भिखारी मुक्त भारत – आत्मनिर्भर भारत अभियान का शुभारंभ | भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट की पहल
नई दिल्ली, [दिनांक]।
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने समाज में आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रव्यापी “भिखारी मुक्त भारत – आत्मनिर्भर भारत” अभियान की शुरुआत की है। इस पहल का नेतृत्व ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव कर रहे हैं।
अभियान का उद्देश्य
इस अभियान का मकसद है –
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भिक्षावृत्ति (Begging) को समाप्त करना
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जरूरतमंदों को रोजगार और काम से जोड़ना
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आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की भावना जगाना
आज भी भारत में बड़ी संख्या में लोग भिक्षावृत्ति के सहारे जीवनयापन करते हैं। यह न केवल उनकी गरिमा को ठेस पहुँचाता है, बल्कि समाज की प्रगति में भी बाधा है।
अभियान के मुख्य बिंदु
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भीख नहीं – काम दें
– जरूरतमंदों को भीख देने के बजाय छोटा-मोटा काम देकर मेहनताना देने की अपील।
– जैसे सड़क सफाई, पौधों को पानी देना, कूड़ा उठाना आदि। -
आत्मनिर्भरता का संकल्प
– संदेश कि भीख से जीवन नहीं बदलता, मेहनत और परिश्रम से ही असली आत्मनिर्भरता संभव है। -
सामाजिक जागरूकता
– स्कूलों, कॉलेजों, सामाजिक संस्थाओं और समुदायों के साथ मिलकर इस संदेश को व्यापक स्तर पर फैलाना।
राष्ट्रीय अध्यक्ष का संदेश
श्री सुनील सिंह यादव ने कहा –
“जब हम किसी जरूरतमंद को सीधे पैसे देते हैं, तो उसकी भिक्षावृत्ति स्थायी बन जाती है। लेकिन यदि हम उसे काम देकर मेहनताना दें, तो उसका आत्मसम्मान और भविष्य दोनों सुरक्षित होते हैं। यह अभियान हर व्यक्ति की क्षमता को पहचानने और सही दिशा देने का प्रयास है।”
उन्होंने आगे कहा –
“‘भिखारी मुक्त भारत – आत्मनिर्भर भारत’ केवल नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प है। इसे सफल बनाने के लिए हर नागरिक, हर संस्था और हर प्रशासनिक इकाई को एकजुट होना होगा।”
सहयोग का आह्वान
इस अभियान को सफल बनाने के लिए शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, सोहन वर्मा, मनीष गुप्ता, श्रीमती सविता अग्रवाल, डॉ. प्रेम कुमार वैद्य, श्रीमती अनीता दुबे, श्रीमती शोम्पा शाह, जीवन लाल जैन (चाय वाले) सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों ने समाजसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संगठनों और प्रशासनिक अधिकारियों से सहयोग करने की अपील की है।
निष्कर्ष
“भीख नहीं – काम देंगे, भिखारी मुक्त भारत बनाएंगे” – यही इस अभियान का मूल मंत्र है। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने जो पहल की है, वह समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकती है।
