अंतराष्ट्रीय फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज द्वारा 1008 यात्रियों के साथ श्री सम्मेद शिखरजी तीर्थ वंदना हेतु इंदौर से प्रस्थान
इंदौर। अंतराष्ट्रीय फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज द्वारा सम्पूर्ण भारत से आए 1008 यात्रियों को पहली बार श्री सम्मेद शिखरजी की तीर्थ वंदना हेतु इंदौर से भव्य यात्रा के लिए रवाना किया गया। यह सात दिवसीय यात्रा पूर्ण सुविधाओं के साथ आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर के विभिन्न क्षेत्रों से तीर्थयात्री शामिल हुए हैं।
इस तीर्थयात्रा में यात्रियों को विधान वस्त्र, द्रव्य सामग्री हेतु बैग, मोबाइल रखने के लिए पॉकेट वाला पर्स, उत्तम भोजन-नाश्ते की व्यवस्था, ठहरने की सुव्यवस्था तथा पारसनाथ स्टेशन से मधुबन तक ट्रांसपोर्टेशन उपलब्ध कराया गया है। सभी यात्री तलहटी के मंदिरों का दर्शन करेंगे।
यात्रा के दौरान श्री सम्मेद शिखर पर्वत पर सफाई अभियान और पर्यावरण सेवा कार्य भी आयोजित होंगे, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की तैयारी है। सभी 1008 यात्री एक साथ 20 तीर्थंकरों की सिद्ध भूमि पर्वतराज सम्मेद शिखरजी की वंदना करेंगे, जो एक अविस्मरणीय दृश्य होगा।
श्री सम्मेद शिखरजी में विराजित पूज्य आर्यिका शुभमति माताजी ससंघ के सानिध्य में श्री सम्मेद शिखरजी विधान का भव्य आयोजन होगा। समापन अवसर पर एक विशाल रथ यात्रा भी निकाली जाएगी।
संगठन की भूमिका और नेतृत्व
इस भव्य योजना को सफल बनाने में अंतराष्ट्रीय फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विपिनजी गांधी और राष्ट्रीय महामंत्री श्री महेंद्रजी बंडी का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने लगभग सवा साल तक लगातार विभिन्न शहरों और गांवों में समाजजनों से संपर्क कर यात्रा की रूपरेखा प्रस्तुत की। उनके प्रयासों से समाज में नई ऊर्जा और चेतना का संचार हुआ।
मध्यप्रदेश और राजस्थान से लगभग 750 तीर्थयात्री इस यात्रा में सम्मिलित हो रहे हैं। यात्रा को सफल बनाने में संधपति विजीत – अनिता रामावत, हसमुख गांधी, शरद पुछडी और विमलचंदजी गांधी का विशेष सहयोग रहा।
राष्ट्रीय महिला प्रभारी कौशल्या पतंग्या, केन्द्रीय संयोजक राजकुमार बंडी और विजय तलाटी सहित पूरी टीम दिन-रात मेहनत कर रही है, ताकि सभी की यात्रा मंगलमय हो। इस आयोजन का मूल उद्देश्य समाजजनों को आपस में जोड़ना, संस्कृति की रक्षा करना और संगठन को मजबूत करना है।
निष्कर्ष
अंतराष्ट्रीय फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज की यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त करेगी, बल्कि समाज के संगठन और संस्कृति संरक्षण की दिशा में भी ऐतिहासिक पहल सिद्ध होगी। निश्चय ही इस यात्रा से समाजजनों के भव-भव के कष्ट दूर होंगे।
