हिमाचल में आपदा का कहर: 5 हजार करोड़ की सेब अर्थव्यवस्था पर संकट
शिमला/कुल्लू/किन्नौर/मंडी: हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादक इलाकों में इस साल भी प्राकृतिक आपदाओं ने बागवानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। लगातार भारी बारिश और भूस्खलन ने हजारों सेब के पेड़ों को नष्ट कर दिया है। शेष फसल भी समय पर मंडियों तक नहीं पहुँच पाने के कारण बागवानों और प्रदेश की 5 हजार करोड़ की सेब अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हुआ है। इस संकट का असर लाखों लोगों के रोजगार पर भी पड़ा है।
कोटखाई में बागवानों की मुश्किलें बढ़ीं
शिमला जिले के कोटखाई, जिसे ‘एप्पल बाउल’ के नाम से भी जाना जाता है, में बागवानों का कहना है कि यह उनके लिए अब तक का सबसे कठिन समय है। भारी बारिश के साथ-साथ सेब के पत्तियों में फैल रही बीमारी ने चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में सड़क मार्ग बंद होने के कारण बागवानों को पुराने समय जैसी तकनीक — स्पैन लगाकर सेब इकट्ठा करना — अपनानी पड़ रही है।
बालकृष्ण, उबादेश के एक बागवान ने कहा, “बारिश ने फसल को नुकसान पहुँचाया और अब बीमारी ने स्थिति और खराब कर दी है। महंगी दवाइयों के इस्तेमाल के बावजूद कोई असर नहीं दिखा। अगर बीमारी का इलाज नहीं हुआ, तो अगले साल की फसल भी प्रभावित होगी।”
भूस्खलन और सड़क बंदी का असर
विशाल बेक्टा, नगान पंचायत के कोलवी गांव से, ने बताया कि उनके 5 बीघे के बागीचे में लगभग 400 सेब के पेड़ भूस्खलन की वजह से नष्ट हो गए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग की ओर से बनाई गई अधूरी सड़कें और ड्रेनेज सिस्टम की कमी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
विकास काल्टा, खल्टूनाला से, ने कहा कि कई इलाकों में बड़ी गाड़ियां अभी भी नहीं जा पा रही हैं। संपर्क मार्ग खुले हैं, लेकिन बागवानों को अब भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उत्पादन और गुणवत्ता पर असर
प्रदेश के कई इलाकों में बी-ग्रेड सेब सड़ने लगे हैं। कुछ बागवान अपने उत्पाद को मजबूरी में कम दामों पर बेचने को मजबूर हैं। इससे न केवल आय प्रभावित हो रही है, बल्कि हिमाचल की सेब की गुणवत्ता पर भी संकट का असर दिखाई दे रहा है।
सरकार की राहत और सड़क बहाली
कोटखाई उपमंडल की 95 प्रतिशत सड़कें बहाल कर दी गई हैं, इसकी जानकारी स्थानीय विधायक और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने दी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आपदा प्रभावितों तक अधिकतम मदद पहुँचाई जाए। लोक निर्माण विभाग के अधीन लगभग 300 सड़कें हैं, जिन्हें इस साल लगभग 170 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
सेब की आपूर्ति जारी
इस सीजन में अब तक लगभग 1.50 करोड़ सेब की पेटियां मंडियों तक पहुँचाई जा चुकी हैं, जो कुल उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत है। शेष 40 प्रतिशत सेब भी सफलतापूर्वक बाजार तक पहुँचाने का प्रयास जारी है। कोटखाई में 37 एप्पल कलेक्शन सेंटर काम कर रहे हैं, जहां से लगभग 11,000 मीट्रिक टन सेब की खरीद की गई है और 7,000 मीट्रिक टन सेब आगे भेजा जा चुका है।
संपत्ति और घरों को नुकसान
कोटखाई में अब तक 8 मकान पूरी तरह और 40 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।


