एशिया का पहला कार्बन-न्यूट्रल सस्टेनेबिलिटी कॉन्फ्रेंस: यूनेस्को ने शिक्षा के जरिए सस्टेनेबल भविष्य पर जोर दिया
नई दिल्ली, सितंबर 2025:
अमृता विश्व विद्यापीठ में आयोजित एशिया का पहला कार्बन-न्यूट्रल इंटरनेशनल सस्टेनेबिलिटी कॉन्फ्रेंस (ICSRSF) ने शिक्षा को सस्टेनेबल भविष्य की कुंजी के रूप में पेश किया। इस चार दिवसीय कार्यक्रम में 20 से ज्यादा देशों के 1,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
यूनेस्को दिल्ली कार्यालय के निदेशक डॉ. टिम करटिस ने कहा, “शिक्षा सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य बनाने की ताकत है।” उन्होंने कॉन्फ्रेंस में सस्टेनेबल और रेजिलिएंट फ्यूचर्स के लिए शिक्षा की अहमियत पर जोर दिया।
उद्घाटन और सम्मानित अतिथि
कार्यक्रम में सरकारी और शैक्षणिक नेतृत्व की भागीदारी रही। इसमें शामिल थे:
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उमा महादेवन दासगुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव और विकास आयुक्त, कर्नाटक
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के. वी. शाजी, नाबार्ड चेयरमैन
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स्वामी पूर्णामृतानंद पुरी, महासचिव, माता अमृतानंदमयी मठ
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अमृता यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ नेता: डॉ. पी. अजीथ कुमार, डॉ. मनीषा वी. रमेश, डॉ. बिपिन जी. नायर और डॉ. एम. रविशंकर
कॉन्फ्रेंस की मुख्य विशेषताएं:
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80+ एक्सपर्ट लेक्चर, वर्कशॉप्स, संगोष्ठी और पेपर प्रेजेंटेशन
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तीन डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च, जिनमें SREE (Sustainability and Resilience by Community Engagement and Empowerment) शामिल
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ग्लोबल पार्टनरशिप फॉर ग्रीनिंग एजुकेशन के तहत 1,300+ संगठन और शिक्षण संस्थान शामिल
डॉ. करटिस ने कहा, “स्थिरता सिर्फ लक्ष्य नहीं, बल्कि सिद्धांत है। यूनेस्को का ‘मैन एंड द बायोस्फियर’ प्रोग्राम मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखता है।”
कॉन्फ्रेंस ने समुदाय आधारित सस्टेनेबल और रेजिलिएंट योजनाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रखा। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ 2022 में जलवायु आपदाओं के कारण 32 मिलियन से ज्यादा लोग विस्थापित हुए।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शिक्षा का महत्व:
इस कॉन्फ्रेंस ने दिखाया कि शिक्षा और वैश्विक साझेदारी के जरिए ही सस्टेनेबल और कार्बन-न्यूट्रल भविष्य संभव है।