शिल्पा शेट्टी-राज कुंद्रा पर 60 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप, EOW ने भेजा समन
बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी और उनके पति बिजनेसमैन राज कुंद्रा एक बार फिर मुश्किलों में फंस गए हैं। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने उन्हें 60.48 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी मामले में पूछताछ के लिए समन जारी किया है।
15 सितंबर को पूछताछ के लिए बुलावा
जानकारी के अनुसार, राज कुंद्रा को 15 सितंबर 2025 को EOW के सामने पेश होना होगा। इससे पहले उन्हें 10 सितंबर को बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने पेशी टालने का अनुरोध किया था। इस बीच, पुलिस ने शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी कर दिया है, ताकि वे देश छोड़कर न जा सकें।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला जुहू पुलिस थाने में दर्ज FIR से जुड़ा है। शिकायतकर्ता दीपक कोठारी, जो लोटस कैपिटल फाइनेंशियल सर्विसेज के डायरेक्टर हैं, का आरोप है कि उन्होंने साल 2015 से 2023 के बीच शिल्पा-राज की कंपनी बेस्ट डील टीवी प्राइवेट लिमिटेड (Best Deal TV Pvt. Ltd.) में करीब 60.48 करोड़ रुपये का निवेश किया।
कोठारी का कहना है कि यह निवेश बिजनेस विस्तार के नाम पर किया गया था, लेकिन पैसों का इस्तेमाल कंपनी में करने के बजाय शिल्पा और राज ने निजी खर्चों में कर लिया।
आरोपों की डिटेल
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शुरुआत में पैसों को लोन बताया गया था।
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बाद में टैक्स बचाने के नाम पर इसे इन्वेस्टमेंट दिखाया गया।
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कोठारी को 12% सालाना ब्याज और तय समय पर रकम वापसी का आश्वासन दिया गया।
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अप्रैल 2016 में शिल्पा शेट्टी ने लिखित रूप से पर्सनल गारंटी भी दी थी।
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कुछ ही समय बाद शिल्पा ने कंपनी से डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया।
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बाद में पता चला कि कंपनी पर 1.28 करोड़ रुपये का इंन्सॉल्वेंसी केस चल रहा है, जिसकी जानकारी निवेशक को नहीं दी गई।
शिकायतकर्ता का पक्ष
दीपक कोठारी के वकील जैन श्रॉफ का कहना है कि उनके मुवक्किल ने पूरे सबूतों के साथ निवेश किया था। कंपनी ने दिवालिया घोषित होकर धोखा दिया और फंड्स को व्यक्तिगत खर्चों में इस्तेमाल किया।
शिल्पा शेट्टी के वकील का जवाब
शिल्पा शेट्टी के वकील प्रशांत पाटिल ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता खुद कंपनी में पार्टनर थे और उनके बेटे को भी डायरेक्टर बनाया गया था। यह एक इक्विटी एग्रीमेंट था, जिसमें मुनाफा-नुकसान दोनों ही पक्षों के बीच बांटा जाना था।
जहाँ तक पर्सनल गारंटी की बात है, वकील का कहना है कि अगर कोई ऐसा दस्तावेज मौजूद है तो उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही फैसला होगा।
