प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा ₹18,036 करोड़ की लागत से इंदौर–मनमाड़ नई रेल लाइन परियोजना को मंजूरी देने के बाद, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच परिवहन, औद्योगिक, कृषि और धार्मिक क्षेत्रों में अभूतपूर्व विकास की संभावना उत्पन्न हुई है।
🛤️ परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ
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कुल लागत: ₹18,036 करोड़
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लंबाई: 309 किलोमीटर
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निर्माण अवधि: 2024 से 2028 तक
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नए स्टेशन: 30 नए रेलवे स्टेशन स्थापित होंगे
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लाभान्वित क्षेत्र: मध्यप्रदेश के इंदौर, धार, बड़वानी, खरगोन और महाराष्ट्र के धुले, नासिक जिले
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लाभार्थी जनसंख्या: लगभग 30 लाख लोग
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कनेक्टिविटी: उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, पिथमपुर औद्योगिक क्षेत्र, और मुंबई बंदरगाह से सीधी रेल संपर्क
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भूमि अधिग्रहण: महाराष्ट्र के नासिक और धुले जिलों में लगभग 940 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता

🏗️ भूमि अधिग्रहण और विकास कार्य
इस परियोजना के लिए महाराष्ट्र के नासिक और धुले जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। नासिक जिले में 360 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, जबकि धुले जिले में 580 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। अब तक, 240 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, और शेष भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। इस परियोजना के तहत लगभग 1,000 गांवों को लाभ होगा और लगभग 30 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
📈 क्षेत्रीय विकास की दिशा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस परियोजना को मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच एक महत्वपूर्ण विकासात्मक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी प्रोत्साहित करेगी। उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग तक सीधी रेल संपर्क से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की संभावना है।
🔄 निष्कर्ष
इंदौर–मनमाड़ नई रेल लाइन परियोजना मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच परिवहन संपर्क को सुदृढ़ करेगी और क्षेत्रीय विकास, औद्योगिक प्रगति, और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार की सक्रिय भूमिका इस परियोजना की सफलता में महत्वपूर्ण होगी।

