महाकालेश्वर मंदिर गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर हाई कोर्ट करेगा फैसला
उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में आम भक्तों के प्रवेश पर डेढ़ साल से रोक लगी हुई है। इस बीच, नेता और वीआईपी लोग आसानी से गर्भगृह में दर्शन कर रहे हैं, जिससे आम श्रद्धालुओं में नाराज़गी बढ़ गई है। अब यह विवाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, इंदौर बेंच तक पहुंच गया है और न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
आम भक्तों की भावनाओं को ठेस
याचिका में बताया गया है कि आम श्रद्धालु महाकालेश्वर मंदिर में दूर-दूर से आते हैं, लेकिन उन्हें गर्भगृह के बाहर ही महाकाल के दर्शन करने पड़ते हैं। वहीं, नेता, उनके परिवार और कुछ व्यापारियों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी जाती है। यह वीआईपी कल्चर आम भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रहा है।
हाई कोर्ट में याचिका में क्या मांगा गया?
इंदौर निवासी दर्पण अवस्थी और उनके वकील चर्चित शास्त्री ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि मंदिर दर्शन के लिए नीति बनाई जाए। इसके तहत आम श्रद्धालु भी गर्भगृह में बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें। याचिका में राज्य सरकार, महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट, उज्जैन कलेक्टर और एसपी को पक्षकार बनाया गया है। याचिका का समर्थन अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने भी किया है और उन्होंने कहा कि दर्शन के लिए शुल्क या समय तय किया जा सकता है, लेकिन आम श्रद्धालुओं को दर्शन से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
क्यों बंद है गर्भगृह में दर्शन?
मंदिर समिति के अनुसार, महाकालेश्वर मंदिर में पहले रोजाना लगभग 20–30 हजार श्रद्धालु गर्भगृह में दर्शन के लिए आते थे। लेकिन अब भक्तों की संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख तक पहुंच गई है। इतने विशाल जनसमूह को नियंत्रित करना मुश्किल होने के कारण गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। वर्तमान में सिर्फ पुजारी, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य अतिविशिष्ट व्यक्तियों को ही गर्भगृह में प्रवेश दिया जाता है।
निष्कर्ष
महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में आम भक्तों के प्रवेश को लेकर मामला हाई कोर्ट में पहुंच गया है। कोर्ट का निर्णय इस मामले में नई दिशा देगा, जिससे वीआईपी और आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था में संतुलन बनाया जा सके।

