सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ब्लेंडर्स प्राइड बनाम लंदन प्राइड ट्रेडमार्क विवाद में पेर्नोड रिकार्ड को झटका
नई दिल्ली (Supreme Court News in Hindi)। सुप्रीम कोर्ट ने मशहूर प्रीमियम व्हिस्की ब्रांड ब्लेंडर्स प्राइड (Blenders Pride) और लंदन प्राइड (London Pride) के बीच चल रहे ट्रेडमार्क विवाद में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पेर्नोड रिकार्ड (Pernod Ricard) की याचिका खारिज करते हुए साफ कर दिया कि कंपनी ‘प्राइड’ (Pride) शब्द पर अकेले अधिकार का दावा नहीं कर सकती।
मामला क्या था?
पेर्नोड रिकार्ड, जो ब्लेंडर्स प्राइड और इंपीरियल ब्लू जैसे ब्रांड बनाती है, ने आरोप लगाया था कि इंदौर के कारोबारी करणवीर सिंह छाबड़ा की कंपनी जेके एंटरप्राइजेज द्वारा लॉन्च किया गया लंदन प्राइड व्हिस्की ब्रांड उसके ट्रेडमार्क और पैकेजिंग (Trade Dress) से काफी मिलता-जुलता है।
कंपनी ने दावा किया था कि –
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‘प्राइड’ शब्द का इस्तेमाल भ्रम पैदा कर सकता है।
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बोतल की पैकेजिंग, कलर स्कीम और लेबल काफी हद तक समान हैं।
पेर्नोड रिकार्ड ने अदालत से लंदन प्राइड पर स्थायी रोक, मुआवजे के रूप में 1 करोड़ रुपये और उल्लंघनकारी सामग्री नष्ट करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा –
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ट्रेडमार्क सुरक्षा केवल पूरे पंजीकृत नाम (Blenders Pride) के लिए लागू होती है, किसी सामान्य शब्द (जैसे ‘Pride’) पर नहीं।
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शराब उद्योग में ‘प्राइड’ शब्द Publici Juris है यानी यह सार्वजनिक उपयोग का हिस्सा है।
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दोनों ब्रांड्स की बोतल, लेबल, लोगो और रंग-रूप में स्पष्ट अंतर है।
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चूंकि प्रीमियम व्हिस्की खरीदने वाले ग्राहक आमतौर पर शिक्षित और जागरूक होते हैं, इसलिए उनके भ्रमित होने की संभावना कम है।
पहले भी मिली थी हार
यह पहली बार नहीं है जब पेर्नोड रिकार्ड को इस तरह के ट्रेडमार्क केस में झटका लगा है। सितंबर 2023 में भी सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की याचिका खारिज करते हुए रॉयल चैलेंजर्स अमेरिकन प्राइड व्हिस्की मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया कि केवल किसी सामान्य शब्द जैसे ‘प्राइड’ पर कंपनियां ट्रेडमार्क का दावा नहीं कर सकतीं। यह फैसला भारतीय शराब उद्योग में ट्रेडमार्क विवादों के लिए अहम नज़ीर बन सकता है।
