इंदौर में ‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’ नियम को हाईकोर्ट की मंजूरी, सुरक्षा के लिए जरूरी बताया
इंदौर। अब इंदौर में बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं मिलेगा। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने कलेक्टर के इस आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए इसे जनहित और सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है।
इंदौर कलेक्टर के फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गई थीं, लेकिन कोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं और नियम को पूरी तरह वैध ठहराया।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद इंदौर के अलावा भोपाल और जबलपुर में भी ‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’ नियम लागू कर दिया गया है। अब बिना हेलमेट के पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं मिलेगा।
यह कदम सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि लोगों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित किया जा सके और दुर्घटनाओं में होने वाली जानमाल की हानि को रोका जा सके।

‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’ नियम पर हाईकोर्ट की मुहर, याचिकाएं खारिज
इंदौर। ‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’ नियम को लेकर दायर जनहित याचिकाओं को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इसे जनता की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताते हुए कलेक्टर के आदेश को सही ठहराया है।
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि यह नियम कानूनन और सार्वजनिक हित में है। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि यह नियम लोगों को असुविधा में डालता है और शहर के भीतर जहां ट्रैफिक धीमा होता है, वहां हेलमेट की जरूरत नहीं होनी चाहिए। लेकिन अदालत ने इन तर्कों को अस्वीकार करते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं।
1 अगस्त से लागू हुआ नियम
यह नियम 1 अगस्त से इंदौर में लागू किया गया है। कलेक्टर आशीष सिंह के आदेश के तहत, बिना हेलमेट पहने दोपहिया वाहन चालकों को अब पेट्रोल नहीं मिलेगा। इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
अब इंदौर के साथ-साथ भोपाल और जबलपुर में भी यह नियम लागू कर दिया गया है, जिससे सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
हाईकोर्ट ने खारिज किए याचिकाकर्ताओं के सभी तर्क, नियम को बताया जरूरी
इंदौर। ‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’ नियम के खिलाफ याचिका दाखिल करने वालों ने कोर्ट में कई तर्क पेश किए, जिनमें कहा गया कि इस तरह का नियम न तो मोटर व्हीकल एक्ट में है और न ही यह व्यावहारिक है। उन्होंने कहा कि शहर में ट्रैफिक धीमा रहता है, कई बार एक बाइक पर चार-पांच लोग सवारी करते हैं, ऐसे में केवल हेलमेट न होने पर पेट्रोल न देना उचित नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि खुद पुलिसकर्मी भी हेलमेट नहीं पहनते, तो पहले उनका चालान किया जाना चाहिए।
कोर्ट का सख्त रुख
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने याचिकाकर्ताओं के सभी तर्कों को खारिज करते हुए साफ कहा कि यह आदेश आमजन की सुरक्षा के हित में है। कोर्ट ने बताया कि सरकारी विभागों में हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है और यह सिर्फ अस्थायी आदेश नहीं है बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक जरूरी पहल है।
कोर्ट परिसर में भी अनिवार्य होगा हेलमेट
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि आने वाले समय में कोर्ट परिसर में भी बिना हेलमेट प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी, और यह नियम हाईकोर्ट कर्मचारियों पर भी लागू किया जाएगा।