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    रक्षाबंधन पर 94 साल बाद बन रहा दुर्लभ महासंयोग,9अगस्त को मनेगा पावन पर्व!

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    Published On: 6 August 2025
    Beautiful Handpainted Rakhi For Your Brother And Bhabhi
    — आगामी 9 अगस्त को 95 वर्ष बाद दुर्लभ महासंयोग होगा।

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    भद्रा काल 8 अगस्त को दोपहर 2:12 बजे शुरू होकर 9 अगस्त की रात 1:52 बजे तक रहेगा। ऐसे में 9 अगस्त को रक्षाबंधन पूरे शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा, क्योंकि इस दिन भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता, इसलिए 9 अगस्त को राखी बांधने का उत्तम समय है।

    HIGHLIGHTS 

    🔸 9 अगस्त को 95 साल बाद बन रहा है दुर्लभ महासंयोग!

    🔸 8 अगस्त दोपहर से भद्रा के साथ शुरू होगी रक्षाबंधन की पूर्णिमा।

    🔸 इस बार नक्षत्र, पूर्णिमा तिथि और राखी बांधने का मुहूर्त – तीनों का अद्भुत संयोग।

    रक्षाबंधन पर 95 वर्षों बाद बन रहा दुर्लभ महासंयोग, 1930 के बाद पहली बार दोहराएगा वही शुभ संयोग

    श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन पर्व इस वर्ष 9 अगस्त, शनिवार को अत्यंत ही शुभ योग में संपन्न होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन 95 वर्षों बाद वह दुर्लभ महासंयोग बन रहा है, जो पूर्व में वर्ष 1930 में बना था। इस अद्भुत संयोग में पूर्णिमा तिथि, श्रवण नक्षत्र, शुभ योग एवं करण, सब कुछ लगभग समान स्थिति में पुनः उपस्थित हो रहे हैं।

    🌕 पूर्णिमा तिथि और भद्रा काल का समय

    वैदिक पंचांग के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 8 अगस्त को दोपहर 2:12 बजे से होगी और यह 9 अगस्त को दोपहर 1:24 बजे तक रहेगी।इसी दौरान भद्रा काल का प्रवेश भी 8 अगस्त को दोपहर 2:12 बजे से होकर 9 अगस्त की रात 1:52 बजे तक रहेगा।

    शास्त्रों में भद्रा काल को अशुभ माना गया है, अतः कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य भद्रा के समय वर्जित रहता है। 9 अगस्त को भद्रा समाप्त हो चुकी होगी, अतः पूरे दिन शुभ समय में राखी का पर्व मनाया जा सकेगा।

    🕉️ राखी बांधने का उत्तम मुहूर्त

    रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर बिना किसी विघ्न के प्रातः 5:35 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक राखी बांध सकती हैं।
    इस अवधि में विशेष शुभ मुहूर्त निम्न प्रकार हैं:

    • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:22 बजे से 5:04 बजे तक
    • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:17 बजे से 12:53 बजे तक
    • अपराह्न काल: सुबह 5:47 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक, यह समय अत्यंत शुभ माना गया है।
    🌟 शुभ योगों की विशेषता
    इस रक्षाबंधन पर अनेक शुभ योग एकसाथ बन रहे हैं, जो इस पर्व को और भी पुण्यमयी बना रहे हैं:
    • सौभाग्य योग: 9 अगस्त को संपूर्ण दिन रहेगा, जिसका समापन 10 अगस्त को रात 2:15 बजे होगा।
    • सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रातः 5:47 बजे से दोपहर 2:23 बजे तक
    • श्रवण नक्षत्र: दोपहर 2:23 बजे तक
    • करण: बव और बालव करण में यह पर्व मनाया जाएगा।
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन संयोगों में लक्ष्मी-नारायण की पूजा एवं रक्षा सूत्र बांधने से दोगुणा पुण्य प्राप्त होता है।
    📜 1930 का ऐतिहासिक संयोग पुनः लौट आया
    वैदिक गणनाओं के अनुसार, शनिवार, 9 अगस्त 1930 को भी रक्षाबंधन का पर्व ठीक इसी प्रकार के संयोग में मनाया गया था। उस दिन पूर्णिमा की तिथि दोपहर 2:07 बजे से शुरू होकर शाम 4:27 बजे तक रही थी। उस वर्ष भी श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग, तथा बव और बालव करण विद्यमान थे।इस प्रकार, 95 वर्षों बाद वही तिथि, नक्षत्र और योग फिर से उपस्थित हो रहे हैं, जो इसे एक अद्वितीय ज्योतिषीय घटना बनाते हैं।
    🔔Conclusion
    रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व ही नहीं, अपितु शुभ मुहूर्तों से भरपूर एक दुर्लभ संयोग भी है। इस बार का रक्षाबंधन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायक माना जा रहा है। पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया गया यह पर्व निश्चित ही सभी को सुख, सौभाग्य और समृद्धि प्रदान करेगा।
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