उत्तराखंड में बादल फटने से मची तबाही: उत्तरकाशी में 12 लोग दबे, 60 लापता; जानिए क्या है बादल फटना और कहां है इसका सबसे ज्यादा खतरा
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में हाल ही में हुई बादल फटने की घटना ने लोगों में भय और चिंता का माहौल बना दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस घटना के वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे कुछ ही सेकंड्स में यह तबाही मच गई। वीडियो में लोग चीखते हुए इधर-उधर भागते हुए नजर आ रहे हैं। अब तक 12 लोगों के मलबे में दबने की सूचना है, जबकि 60 लोगों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है। उत्तरकाशी के धराली इलाके में बादल फटने का वीडियो बेहद डरावना है, जहां मिनटों में पानी का सैलाब लोगों की ज़िन्दगी को प्रभावित करता हुआ दिख रहा है।
क्या है बादल फटना और क्यों होता है?
मौसम विभाग के मुताबिक, यदि किसी छोटे इलाके में एक घंटे में 10 सेंटीमीटर या उससे अधिक बारिश होती है तो इसे बादल फटना कहा जाता है। यह घटना एक ही स्थान पर एक से अधिक बार भी हो सकती है। बादल फटने के पीछे दो प्रमुख कारण होते हैं – भौगोलिक स्थिति और मौसम। जब मानसूनी हवाएं और नमी वाली हवाएं पहाड़ों से टकराती हैं, तो वे तेजी से ऊपर उठती हैं। ऊंचाई पर तापमान कम होने के कारण नमी पानी की बूंदों में बदल जाती है और भारी बारिश होती है, जिससे बादल फटने जैसी घटनाएं होती हैं। पहाड़ी इलाकों में यह भारी बारिश तबाही मचाती है, और मलबा, चट्टानें, और पानी तेजी से आबादी की ओर बढ़ते हैं।
जब हवा में अधिक नमी होती है तो बादल फटने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। कभी-कभी, धीमी गति से चलने वाला बादल किसी क्षेत्र में रुक जाता है, जिसके परिणामस्वरूप कम समय में भारी बारिश होती है।
उत्तराखंड और हिमाचल में क्यों होती हैं अधिक बादल फटने की घटनाएं?
मानसून के दौरान नमी से भरी हवाएं अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से हिमालय की ओर बढ़ती हैं। जब ये हवाएं उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों से टकराती हैं, तो वे तेजी से ऊपर की ओर उठती हैं। ऊंचाई पर तापमान कम होने के कारण यह नमी संघनित होकर बारिश का कारण बनती है।
उत्तराखंड और हिमाचल में घाटियां संकरी होने के कारण इन इलाकों में तूफानी बादल फंस जाते हैं और वहां बारिश की अधिकतम घटनाएं होती हैं। इस कारण बादल फटने की घटनाएं ज्यादा होती हैं।
भारत में बादल फटने का खतरा कहां ज्यादा है?
भारत में बादल फटने की घटनाएं मुख्य रूप से हिमालयी और पश्चिमी घाट क्षेत्रों में देखी जाती हैं। इसमें जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। वहीं, पश्चिमी घाटों में जैसे केरल, कर्नाटक, और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में इसका खतरा कम होता है।
बादल फटने की घटनाएं कब होती हैं?
ये घटनाएं मानसून और प्री-मानसून के दौरान अधिक होती हैं, खासकर मई से अगस्त के बीच।
