8वां वेतन आयोग: वेतन वृद्धि के साथ पेंशन, इलाज और शिक्षा सुविधाओं पर जोर, जानें कर्मचारियों की नौ प्रमुख मांगें
नई दिल्ली। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की अपेक्षाएं वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं हैं। कर्मचारी संगठनों ने पेंशन की सुरक्षा, कैशलेस उपचार, बच्चों की उच्च शिक्षा, पदोन्नति और जोखिम भत्ते जैसे विषयों पर भी सुधार की मांग उठाई है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य सेवाकाल के दौरान आर्थिक राहत और सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, ये मांगें हैं; इन्हें स्वीकृत सुविधाएं या लागू सरकारी निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
1. पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन व्यवस्था यानी OPS की बहाली शामिल है। कर्मचारी पक्ष सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित और सुरक्षित पेंशन चाहता है। संगठनों का जोर इस बात पर है कि नौकरी समाप्त होने के बाद भी कर्मचारियों को नियमित आय मिले और परिवार की आवश्यकताओं के लिए आर्थिक अनिश्चितता कम हो।
2. कैशलेस और सुलभ चिकित्सा सुविधा
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था को व्यापक बनाने की मांग की गई है। इसका उद्देश्य उपचार के समय अपनी जेब से बड़ी रकम जमा करने की परेशानी कम करना है। विशेष रूप से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अस्पताल तक आसान पहुंच और भुगतान की सरल प्रक्रिया महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
3. बच्चों की उच्च शिक्षा तक सहायता
शिक्षा भत्ता और हॉस्टल सब्सिडी का दायरा स्नातकोत्तर तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई का खर्च उच्च शिक्षा में भी जारी रहता है। इसलिए शिक्षा संबंधी सहायता का विस्तार परिवारों को राहत दे सकता है। यह विस्तार अभी मांग का हिस्सा है।
4. ग्रेच्युटी और पारिवारिक पेंशन में सुधार
सेवानिवृत्ति अथवा कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में मिलने वाले लाभों में सुधार भी प्रमुख विषय है। संगठनों ने ग्रेच्युटी, पारिवारिक पेंशन और पेंशन के एकमुश्त लिए गए हिस्से से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग उठाई है। इन लाभों का संबंध कर्मचारी के साथ उसके आश्रित परिवार की आर्थिक सुरक्षा से भी है।
5. न्यूनतम वेतन और वेतन संरचना की समीक्षा
कर्मचारी पक्ष न्यूनतम वेतन निर्धारित करने के आधार और अलग-अलग वेतन स्तरों की समीक्षा चाहता है। योग्यता, काम की प्रकृति तथा जिम्मेदारियों के अनुरूप वेतन तय करने पर जोर दिया गया है। कुछ वेतनमानों के विलय और कुशल श्रेणियों के प्रवेश स्तर के वेतन में सुधार के सुझाव भी सामने आए हैं।
6. पदोन्नति नहीं मिलने पर बेहतर आर्थिक प्रगति
लंबे समय तक पदोन्नति नहीं मिलने वाले कर्मचारियों के लिए MACP व्यवस्था में सुधार की मांग है। यह विषय ऐसे कर्मचारियों की आर्थिक प्रगति से जुड़ा है, जिन्हें नियमित पदोन्नति के सीमित अवसर मिलते हैं। कर्मचारी पक्ष चाहता है कि पदोन्नति में ठहराव का असर पूरे सेवाकाल की आय पर लगातार न पड़े।
7. रेलवे कर्मचारियों के जोखिम भत्ते पर जोर
रेलवे कर्मचारियों से जुड़े प्रस्तावों में जोखिम भत्ता समिति की सिफारिशों को लागू करने का मुद्दा उठाया गया है। कठिन परिस्थितियों और जोखिम वाली जिम्मेदारियों के अनुरूप आर्थिक लाभ की मांग की गई है। रनिंग अलाउंस को आयकर से छूट देने का विषय भी कर्मचारी पक्ष ने अपनी चर्चा में रखा है।
8. रक्षा असैनिक कर्मचारियों के लंबित मुद्दों का समाधान
रक्षा विभाग के असैनिक कर्मचारियों के जोखिम भत्ते और सेवा संबंधी लंबित प्रस्तावों पर निर्णय की मांग भी उठी है। कर्मचारी पक्ष ने कैडर समीक्षा तथा कारीगर कर्मचारियों के विभिन्न ग्रेडों के अनुपात जैसे विषयों का उल्लेख किया है। इन मामलों को वेतन आयोग का हवाला देकर लंबित नहीं रखने का आग्रह किया गया है।
9. आयोग के दायरे का विस्तार
कुछ कर्मचारी श्रेणियों को आयोग के विचार क्षेत्र में शामिल करने की मांग भी सामने आई है। कर्मचारी पक्ष ने ग्रामीण डाक सेवकों और चुनाव आयोग के कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। इसका उद्देश्य संबंधित श्रेणियों की सेवा स्थितियों और आर्थिक आवश्यकताओं पर विचार सुनिश्चित करना है।
मांगों और अंतिम निर्णय में अंतर
आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 की अधिसूचना से हुआ था। आयोग वेतन, सेवानिवृत्ति लाभ और सेवा शर्तों से जुड़े विषयों पर सिफारिशें तैयार करता है। कर्मचारी संगठनों के प्रस्ताव इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं। वास्तविक लाभ, उनकी पात्रता और लागू होने की स्थिति संबंधित आधिकारिक निर्णयों से स्पष्ट होगी।
