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Sarangpur में 7 दिवसीय गीता ज्ञान प्रवचन का शुभारंभ, कलश यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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Published On: 8 August 2026
Sarangpur

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Sarangpur में सात दिवसीय गीता ज्ञान प्रवचन का शुभारंभ, कलश यात्रा में गूंजा धर्म और आध्यात्म का संदेश

संवाददाता : मनोज कुमार पुष्पद

श्रावण मास में मांगलिक भवन परिसर में हुआ आयोजन, ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने बताई गीता ज्ञान की महिमा

Sarangpur (म.प्र.), 8 अगस्त। पवित्र श्रावण मास के अवसर पर सारंगपुर नगर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। नगर पालिका के पीछे स्थित मांगलिक भवन परिसर में सात दिवसीय गीता ज्ञान प्रवचन कार्यक्रम का शुभारंभ धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भव्य कलश यात्रा, दीप प्रज्वलन एवं सत्य-सनातन धर्म के जयघोष के साथ हुई।

कार्यक्रम में बाल ब्रह्मचारिणी एवं राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने अपने मुखारविंद से गीता ज्ञान की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को जीवन में सत्य, धर्म, सद्कर्म और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।

कलश यात्रा के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

सात दिवसीय गीता ज्ञान यज्ञ के शुभारंभ अवसर पर नगर में कलश यात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं और मातृशक्ति ने उत्साहपूर्वक इसमें सहभागिता की। यात्रा के दौरान परमात्म संदेश देते हुए नगरवासियों को गीता ज्ञान प्रवचन कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया गया।

मांगलिक भवन परिसर में पहुंचने के बाद विधिवत दीप प्रज्वलन कर प्रवचन कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। धार्मिक वातावरण में श्रद्धालुओं ने प्रवचन सुना और गीता के आध्यात्मिक संदेश को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

कौरव-पांडवों के माध्यम से धर्म-अधर्म की व्याख्या

प्रवचन के प्रथम दिवस ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने कौरव और पांडवों का यथार्थ परिचय कराते हुए धर्म एवं अधर्म की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि महाभारत केवल इतिहास की एक घटना नहीं है, बल्कि इसके पात्र और उनके गुण-दोष आज भी मानव जीवन और समाज में दिखाई देते हैं।

उन्होंने कर्मक्षेत्र रूपी कुरुक्षेत्र की व्याख्या करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में निरंतर सही और गलत के बीच संघर्ष चलता रहता है। ऐसे समय में गीता का ज्ञान व्यक्ति को सही मार्ग चुनने की शक्ति देता है।

सत्कर्मों में भगवान का सहयोग मिलता है

भाग्यलक्ष्मी दीदी ने कहा कि भगवान हमारे सत्कर्मों में सदैव सहयोगी रहते हैं। अच्छे कर्म आत्मा के बल को बढ़ाते हैं और व्यक्ति को सत्य-असत्य तथा धर्म-अधर्म में अंतर समझने की शक्ति प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि जब मनुष्य ईश्वरीय ज्ञान को जीवन में धारण करता है तो उसके भीतर विवेक और आत्मबल का विकास होता है। यही आत्मबल उसे कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने और ईश्वरीय मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

आज भी दिखाई देते हैं महाभारत के पात्र

प्रवचन के दौरान वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने कहा कि आज भी समाज में महाभारत के पात्रों के समान प्रवृत्तियां देखने को मिलती हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि धन का दुरुपयोग करने वाली प्रवृत्ति में दुर्योधन दिखाई देता है, जबकि शासन अथवा शक्ति का दुरुपयोग करने वाली बुरी नियत की प्रवृत्ति दुशासन का स्वरूप प्रस्तुत करती है। इसी प्रकार भ्रम और इधर-उधर करने वाली प्रवृत्ति में शकुनी जैसी मानसिकता भी समाज में दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि इन प्रवृत्तियों से बचने के लिए व्यक्ति को आत्मचिंतन और ईश्वरीय ज्ञान की आवश्यकता है।

मानसिक युद्ध से बाहर निकलने का संदेश

ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने कहा कि आज पूरे विश्व में महाभारत के युद्ध के समान ही प्रत्येक व्यक्ति के भीतर मानसिक संघर्ष चल रहा है। मनुष्य अनेक प्रकार के तनाव, भ्रम, इच्छाओं और परिस्थितियों के बीच सही निर्णय लेने के लिए संघर्ष करता है।

ऐसे समय में गीता का ज्ञान व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मबल प्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा हमें ज्ञान के दिव्य चक्षु प्रदान करते हैं, जिससे हम जीवन की वास्तविकता को समझ सकें और ईश्वरीय निर्देशों के अनुसार अपने जीवन को आगे बढ़ा सकें।

गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम में लायंस क्लब अध्यक्ष विनय मकोड़िया, राज्य कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र वर्मा, राधेश्याम माहेश्वरी, पार्षद राकेश पुष्पद, गोपाल, बाबूलाल, जुगल चौहान, कमल सोलंकी, कंडारे, बालोड़ी के पूर्व सरपंच धीरेन्द्र सिंह, रूप सिंह तथा ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

आयोजकों एवं मातृशक्ति द्वारा प्रवचनकर्ता ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में नगर के वरिष्ठजन, धर्मप्रेमी नागरिक, माताएं एवं बहनें बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।

सातों दिन प्रवचन में शामिल होने का आह्वान

आयोजकों ने नगरवासियों से सातों दिन आयोजित होने वाले गीता ज्ञान प्रवचन कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि गीता का ज्ञान केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में धारण करने का माध्यम है।

सात दिवसीय इस आयोजन के माध्यम से नगरवासियों को आध्यात्मिक ज्ञान, आत्मचिंतन, सद्कर्म और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश दिया जा रहा है। कार्यक्रम के शुभारंभ से ही मांगलिक भवन परिसर में भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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