पंचम दिवस सिद्धि तप तपस्वियों के पद पक्षालन एवं वधामणा का भव्य आयोजन
52 सिद्धि तप तपस्वियों के साथ 100 से अधिक समाजजनों ने किया सामूहिक एकाशना
महिदपुर रोड। नगर में श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान भवन में आयोजित भव्य एवं ऐतिहासिक चातुर्मास के अंतर्गत शुक्रवार को सिद्धि तप के पंचम दिवस विशेष धार्मिक आयोजन हुआ। 52 सिद्धि तप तपस्वियों के सप्त दिवसीय वधामणा कार्यक्रम के पांचवें दिन तपस्वियों के पद पक्षालन एवं वधामणा का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। धार्मिक वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में तपस्वियों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट किया गया। आयोजन परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी, साध्वी निरागरसा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा की पावन निश्रा में संपन्न हुआ।
भंडारी परिवार ने लिया पद पक्षालन वधामणा का लाभ
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि पंचम दिवस आयोजित पद पक्षालन एवं वधामणा का मंगलकारी लाभ सुभाष चंद्र, संदीप कुमार, गौरव कुमार, अमोल और अक्षय भंडारी परिवार, बप्पैया वाला द्वारा लिया गया।
लाभार्थी परिवार ने धार्मिक परंपरा के अनुसार तपस्वियों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित समाजजनों ने भी तपस्वियों के तप और संयम की सराहना करते हुए उनके प्रति सम्मान प्रकट किया।
100 से अधिक लोगों ने किया सामूहिक एकाशना
कार्यक्रम के दौरान 100 से अधिक समाजजनों ने सामूहिक एकाशना तप का लाभ लिया। सामूहिक एकाशना का मंगलकारी लाभ लीलाबाई, पुत्र दिनेश कुमार, अनिल कुमार एवं राजेश कुमार कांठेड़ परिवार द्वारा लिया गया।
बड़ी संख्या में समाजजनों के एक साथ तपस्या में शामिल होने से पूरे आयोजन का धार्मिक वातावरण और अधिक प्रभावशाली बन गया। तपस्या और सामूहिक धार्मिक साधना के माध्यम से श्रद्धालुओं ने आत्मिक शांति और पुण्य लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया।
छोटे से श्रीसंघ ने बनाया तपस्या का नया कीर्तिमान
महिदपुर रोड के जैन समाज की संख्या लगभग 190 बताई गई है। इसके बावजूद समाज में 52 सिद्धि तप, दो मासक्षमण तप तथा शुक्रवार को 100 से अधिक समाजजनों द्वारा सामूहिक एकाशना किया जाना उल्लेखनीय उपलब्धि माना जा रहा है।
कम संख्या वाले श्रीसंघ में इतनी बड़ी संख्या में समाजजनों का तपस्या से जुड़ना धार्मिक दृष्टि से विशेष उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। आयोजन में तप, संयम और धार्मिक साधना के प्रति समाज की आस्था स्पष्ट दिखाई दी।
जैन समाज के लोगों ने कहा कि तपस्या केवल व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बनती है। जब बड़ी संख्या में लोग सामूहिक रूप से धार्मिक साधना से जुड़ते हैं तो इससे आने वाली पीढ़ियों में भी धर्म और संस्कारों के प्रति रुचि बढ़ती है।
चातुर्मास के दौरान लगातार धार्मिक आयोजन
महिदपुर रोड में इस वर्ष चातुर्मास के अवसर पर धार्मिक गतिविधियों का सिलसिला जारी है। नगर के श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान भवन में परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी, साध्वी निरागरसा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा की पावन निश्रा में विभिन्न धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।
चातुर्मास के दौरान श्रद्धालुओं को धर्म, तप, संयम और आत्मचिंतन से जुड़े संदेश दिए जा रहे हैं। इसी क्रम में सिद्धि तप का आयोजन भी श्रद्धा और उत्साह के साथ चल रहा है।

साध्वी विरागरसा श्री महाराज साहब ने दिया संयम का संदेश
कार्यक्रम के दौरान साध्वी विरागरसा श्री महाराज साहब ने उपस्थित समाजजनों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संयम जीवन ही मोक्ष का श्रेष्ठ मार्ग है।
उन्होंने जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों को समझाते हुए कहा कि सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र ही मोक्ष का परम एवं श्रेष्ठ मार्ग हैं। मनुष्य को अपने जीवन में इन सिद्धांतों को अपनाकर आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
साध्वी जी ने कहा कि धार्मिक जीवन का उद्देश्य केवल बाहरी कर्मकांड तक सीमित नहीं होना चाहिए। व्यक्ति को अपने विचारों, व्यवहार और आचरण में भी धर्म को उतारना चाहिए। संयम और आत्मानुशासन के माध्यम से जीवन को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है।
तपस्या आत्मशुद्धि का माध्यम
धार्मिक आयोजन में तपस्या के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। जैन धर्म में तप को आत्मशुद्धि और कर्म निर्जरा का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। तपस्या के दौरान व्यक्ति अपनी इच्छाओं और भौतिक सुविधाओं पर नियंत्रण रखते हुए आत्मचिंतन की ओर बढ़ता है।
52 सिद्धि तप तपस्वियों द्वारा की जा रही साधना समाज के अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बनी हुई है। उनके तप और संयम को देखकर अन्य समाजजन भी धार्मिक साधना के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
धार्मिक भक्ति और प्रभावना का लाभ
शुक्रवार के संपूर्ण दिवस की धार्मिक भक्ति एवं प्रभावना का मंगलकारी लाभ अजय कुमार एवं प्रियांशु बरडिया परिवार द्वारा लिया गया।
लाभार्थी परिवारों का जैन श्रीसंघ की ओर से स्वागत एवं बहुमान किया गया। धार्मिक आयोजन में लाभ लेने वाले परिवारों के प्रति समाजजनों ने शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
जैन समाज में धार्मिक आयोजनों के दौरान लाभार्थी परिवारों का सम्मान करने की परंपरा रही है। इससे समाज के अन्य परिवारों को भी धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों में सहभागिता के लिए प्रेरणा मिलती है।
तपस्वियों के प्रति समाज ने व्यक्त की श्रद्धा
पद पक्षालन और वधामणा के आयोजन में तपस्वियों के प्रति समाजजनों की श्रद्धा देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने तपस्वियों का सम्मान करते हुए उनके तप और साधना की अनुमोदना की।
सप्त दिवसीय वधामणा के पांचवें दिन हुए इस आयोजन में धार्मिक अनुशासन और भक्ति का वातावरण बना रहा। समाज के लोगों ने तपस्वियों के तप की अनुमोदना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।
विधायक सहित अनेक गणमान्य लोग हुए शामिल
कार्यक्रम में सकल जैन श्रीसंघ के सदस्यों के साथ क्षेत्रीय विधायक एवं जैन समाज गौरव दिनेश जैन बोस सहित बाहर से आए अनेक महानुभावों ने भी सहभागिता की।
सभी ने धार्मिक कार्यक्रम में उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया। आयोजन में समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं और अन्य श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
समाज की एकजुटता का दिखा परिचय
इस आयोजन के माध्यम से महिदपुर रोड के जैन समाज की धार्मिक एकजुटता और सामूहिक सहभागिता भी सामने आई। सीमित संख्या वाले श्रीसंघ में 52 सिद्धि तप, दो मासक्षमण और 100 से अधिक लोगों द्वारा सामूहिक एकाशना करना समाज की धार्मिक सक्रियता को दर्शाता है।
चातुर्मास के दौरान आयोजित हो रहे इन कार्यक्रमों में समाज के अलग-अलग परिवार धार्मिक लाभ ले रहे हैं। इससे न केवल धार्मिक वातावरण निर्मित हो रहा है, बल्कि समाज में परस्पर सहयोग और एकता की भावना भी मजबूत हो रही है।
तप, संयम और आत्मचिंतन का संदेश
सिद्धि तप के पंचम दिवस आयोजित पद पक्षालन एवं वधामणा कार्यक्रम ने समाजजनों को तप, संयम और आत्मचिंतन का संदेश दिया। साध्वी जी के प्रवचन में सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र को जीवन का आधार बनाने पर जोर दिया गया।
धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता से यह स्पष्ट हुआ कि समाज में आज भी तप और संयम की परंपरा के प्रति गहरी आस्था है।
महिदपुर रोड में चल रहा यह चातुर्मास धार्मिक गतिविधियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। सिद्धि तप के माध्यम से तपस्वियों की साधना और समाजजनों की सामूहिक सहभागिता ने आयोजन को विशेष बना दिया है। पंचम दिवस का यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति, तपस्या और संयम के संदेश के साथ संपन्न हुआ।
