लायंस नेत्र चिकित्सालय के पांच दिवसीय शिविर में 1270 से अधिक बच्चों की जांच, 400 को मिले चश्मे के नंबर
जावरा (निप्र)। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूली बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लायन्स क्लब जावरा द्वारा संचालित लायंस नेत्र चिकित्सालय ने जिला अंधत्व निवारण समिति के सहयोग से पांच दिवसीय विशेष नेत्र परीक्षण अभियान आयोजित किया। ‘शालेय नेत्र परीक्षण कार्यक्रम’ के तहत आयोजित इन शिविरों में ग्रामीण क्षेत्र के 1270 से अधिक स्कूली बच्चों की आंखों की जांच की गई। इनमें दृष्टि दोष पाए जाने पर करीब 400 बच्चों को चश्मे के नंबर दिए गए।
लायन्स क्लब जावरा के सचिव ला. संदीप रांका एवं नेत्र चिकित्सालय चेयरमैन ला. प्रदीप शर्मा ने बताया कि क्लब अध्यक्ष ला. सुधीर जैन के कुशल प्रबंधन में यह अभियान संचालित किया गया। अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को उनके नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर ही नेत्र परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराना था, ताकि बच्चों में दृष्टि संबंधी परेशानी का समय रहते पता लगाया जा सके।
पांच दिनों में पांच केंद्रों पर हुआ परीक्षण
अभियान की शुरुआत 13 अगस्त को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ढोढर से हुई। यहां 240 स्कूली बच्चों की आंखों की जांच की गई। इसके बाद 14 अगस्त को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपलोदा में 230 बच्चों का नेत्र परीक्षण किया गया।
18 अगस्त को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुखेड़ा में आयोजित शिविर में 250 विद्यार्थियों की आंखों की जांच की गई। 19 अगस्त को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र माताजी बडायला में 280 बच्चों का परीक्षण हुआ। अभियान के अंतिम दिन 20 अगस्त को कालूखेड़ा केंद्र में 270 स्कूली बच्चों की आंखों की जांच की गई।
इस प्रकार पांच दिवसीय अभियान के दौरान विभिन्न ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर बड़ी संख्या में बच्चों तक नेत्र स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गईं। जांच के दौरान जिन विद्यार्थियों में दृष्टि संबंधी कमी पाई गई, उन्हें चिकित्सकीय परीक्षण के बाद चश्मे के नंबर दिए गए।
मोबाइल एंबुलेंस से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंची सुविधा
अभियान में लायन्स नेत्र चिकित्सालय के ऑप्टोमेट्रिस्ट दिनेश नागदा एवं पूरण सिंह, सरकारी अस्पताल में कार्यरत ऑप्टोमेट्रिस्ट अनूप जोशी तथा पैरामेडिकल स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम ने आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित मोबाइल एंबुलेंस के माध्यम से विभिन्न ग्रामीण केंद्रों पर पहुंचकर बच्चों की आंखों की जांच की।
मोबाइल एंबुलेंस के माध्यम से जांच सुविधा ग्रामीण क्षेत्र में पहुंचने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को काफी सुविधा मिली। जिन बच्चों को दृष्टि संबंधी समस्या थी, उनकी प्रारंभिक पहचान शिविर में ही की गई।
समय पर जांच से पढ़ाई में मिलेगा लाभ
नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या का समय पर पता लगना बेहद महत्वपूर्ण है। आंखों की कमजोरी के कारण कई बार विद्यार्थियों को कक्षा में बोर्ड देखने, किताब पढ़ने या लिखने में परेशानी होती है। इसका असर उनकी पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
ऐसे में स्कूल स्तर पर नियमित नेत्र परीक्षण से दृष्टि दोष की शुरुआती अवस्था में पहचान की जा सकती है। समय पर चश्मा मिलने से बच्चों को पढ़ाई में होने वाली परेशानी कम करने में मदद मिलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के शिविर विशेष रूप से उपयोगी साबित होते हैं, क्योंकि कई परिवार नियमित नेत्र जांच के लिए दूर स्थित अस्पतालों तक नहीं पहुंच पाते।
स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की दिशा में पहल
लायन्स क्लब जावरा और जिला अंधत्व निवारण समिति के सहयोग से आयोजित यह अभियान केवल नेत्र परीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों और अभिभावकों के बीच आंखों की देखभाल को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल रहा।
अभियान के दौरान बच्चों की दृष्टि की जांच के साथ उन्हें आंखों के स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतने की आवश्यकता बताई गई। बच्चों में किसी भी प्रकार की दृष्टि संबंधी परेशानी दिखाई देने पर समय पर विशेषज्ञ से जांच कराने का संदेश भी दिया गया।
लायन्स क्लब पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था भविष्य में भी जरूरत के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के लिए प्रयासरत रहेगी। बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े विषयों पर लगातार काम करना संस्था की प्राथमिकताओं में शामिल है।
पांच दिवसीय अभियान के सफल आयोजन से ग्रामीण क्षेत्र के बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को सीधे लाभ मिला। 1270 से अधिक बच्चों का नेत्र परीक्षण और करीब 400 बच्चों में दृष्टि दोष की पहचान इस अभियान की प्रमुख उपलब्धि रही। आधुनिक उपकरणों से लैस मोबाइल एंबुलेंस और विशेषज्ञ टीम की सेवाओं के माध्यम से ग्रामीण विद्यार्थियों तक नेत्र स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने की यह पहल क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने वाली साबित हुई।
