महाराष्ट्र में 350 वर्ष पुराने जैन मंदिर को ध्वस्त करने का नोटिस: जैन समाज में गहरी चिंता
पंढरपुर, महाराष्ट्र – महाराष्ट्र सरकार द्वारा पंढरपुर स्थित 350 वर्ष पुराने प्राचीन श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर को सड़क चौड़ीकरण के नाम पर ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया गया है, जिससे जैन समाज में गहरी चिंता और विरोध की लहर दौड़ गई है। इस बाबत विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू, और मयंक जैन ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया है।
जैन समाज ने किया विरोध
जैन समाज ने महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी दी है कि 350 वर्ष पुराने मंदिर का ध्वस्त होना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत दुखद और अस्वीकार्य है। राजेश जैन दद्दू ने कहा कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि जैन धर्म की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध किया है कि संबंधित विभाग को तत्काल आदेश जारी करके मंदिर को ध्वस्त करने की योजना को रोकने का निर्देश दें।
संजय जैन ने भी कहा कि यह कदम न केवल जैन समाज के लिए बल्कि पूरे देश के सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से अपील की कि मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान लागू किए जाएं।
प्राचीन मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर पंढरपुर में स्थित है और इसकी स्थापना लगभग 350 वर्ष पहले हुई थी। यह मंदिर जैन धर्म के अनुयायियों के लिए न केवल पूजा स्थल है, बल्कि एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र भी है। मंदिर में कई प्राचीन जैन मूर्तियाँ, शिलालेख और कलात्मक संरचनाएँ मौजूद हैं, जो जैन वास्तुकला और धार्मिक इतिहास की अनमोल धरोहर मानी जाती हैं।
जैन समाज का कहना है कि यदि यह मंदिर ध्वस्त किया गया, तो यह न केवल धार्मिक दृष्टि से अपूरणीय क्षति होगी, बल्कि महाराष्ट्र और पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत को भी नुकसान पहुंचाएगा।
सड़क चौड़ीकरण और धार्मिक स्थलों पर असर
महाराष्ट्र सरकार का यह कदम सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत बताया गया है, लेकिन जैन समाज का मानना है कि सरकार को धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए। राजेश जैन दद्दू ने स्पष्ट किया कि जैन मंदिर जैसे प्राचीन धार्मिक स्थल केवल सड़क चौड़ीकरण के लिए नष्ट नहीं किए जा सकते।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार को इस प्रकार की परियोजनाओं में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के प्रावधानों का पालन करना चाहिए और धार्मिक स्थलों को ध्वस्त करने से पहले समाज के साथ समन्वय करना चाहिए।
जैन संगठनों की मांगें
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महाराष्ट्र सरकार से तत्काल मंदिर ध्वस्त करने के नोटिस को रद्द करने का अनुरोध।
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संबंधित विभाग को आदेश जारी कर प्राचीन श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
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सड़क चौड़ीकरण परियोजना में धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की रक्षा के लिए विशेष नियम लागू करना।
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जैन समाज और अन्य धार्मिक संगठनों के साथ संवाद और समन्वय स्थापित करना।
सामाजिक और धार्मिक संदेश
जैन समाज ने यह भी जोर देकर कहा कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण केवल जैन समाज का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। यदि प्राचीन मंदिर को नष्ट किया गया, तो यह न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत पर भी नकारात्मक प्रभाव डालेगा।
निष्कर्ष
इस घटना ने जैन समाज में चिंता और आक्रोश पैदा किया है। संजय जैन, राजेश जैन दद्दू, और मयंक जैन ने महाराष्ट्र सरकार से अपील की है कि वह प्राचीन जैन मंदिरों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और सड़क चौड़ीकरण जैसी परियोजनाओं में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को नुकसान न पहुँचाने के लिए विशेष सावधानी बरतें।
जैन समाज के नेताओं का मानना है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा केवल धर्म का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और इतिहास की रक्षा का सवाल है। यदि सरकार समय रहते उचित कदम नहीं उठाती है, तो जैन समाज और अन्य धार्मिक संगठन कानूनी और सामाजिक माध्यमों से इस मंदिर की सुरक्षा के लिए संघर्ष करेंगे।
