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Bhopal में ट्रेन से कछुओं की तस्करी, कोच अटेंडर के बैग से 311 इंडियन टेंट टर्टल बरामद, इंदौर-देवास सप्लाई रोकी

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Published On: 4 February 2026
311 Rare Indian Tent Turtles Seized from Train Attender in Bhopal; Supply to Indore-Devas Stopped
— 311 Rare Indian Tent Turtles Seized from Train Attender in Bhopal; Supply to Indore-Devas Stopped

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Bhopal में 311 दुर्लभ इंडियन टेंट टर्टल कछुओं की तस्करी का मामला, रेलवे कोच अटेंडर गिरफ्तार

Bhopal के संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन पर एक बड़ी वन्यजीव तस्करी का मामला सामने आया है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने पटना-इंदौर एक्सप्रेस में छापेमारी कर एक रेलवे कोच अटेंडर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी अजय सिंह राजपूत के बैग से 311 इंडियन टेंट टर्टल कछुए बरामद किए गए। यह खेप इंदौर और देवास में सप्लाई की जानी थी।

आरपीएफ की रूटीन जांच में हुआ खुलासा

आरपीएफ स्टाफ स्टेशन पर रूटीन चेकिंग कर रहा था, तभी कोच A-1 के अटेंडर अजय सिंह राजपूत के पास दो बैग संदिग्ध नजर आए। तलाशी लेने पर बैग के अंदर छोटे आकार के दुर्लभ कछुए पाए गए। यह कछुए मुख्य रूप से इंडियन टेंट टर्टल प्रजाति के थे, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित हैं।

सूचना मिलते ही स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STF) और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। मौके पर स्थिति का जायजा लेने के बाद सभी कछुओं को सुरक्षित वन विभाग की निगरानी में रखा गया।

तस्करी का उद्देश्य और लालच

पूछताछ में आरोपी अजय सिंह राजपूत ने स्वीकार किया कि रवींद्र कश्यप नामक व्यक्ति ने उसे 2,500 रुपये के लालच में कछुओं की खेप देवास और इंदौर भेजने को कहा था। आरोपी का कहना था कि यह कार्य पार्सल के रूप में करना था। इस खुलासे के बाद आरपीएफ और वन विभाग ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन दुर्लभ कछुओं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग है। इनका उपयोग मुख्य रूप से शक्तिवर्धक दवाइयों और मांस उद्योग के लिए किया जाता है। इस वजह से यह तस्करी का शिकार बनते हैं। सभी 311 कछुओं को वन विभाग की निगरानी में सुरक्षित रखा गया है और उनकी देखभाल की जा रही है।

STF की जांच और मास्टरमाइंड की तलाश

एसटीएफ ने इस मामले में आरोपी रवींद्र कश्यप की तलाश शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि वह इस तस्करी का मास्टरमाइंड है और अक्सर रेलवे और अन्य परिवहन माध्यमों के जरिए वन्यजीवों की तस्करी कराता रहा है। आरपीएफ और वन विभाग मिलकर आरोपी तक पहुँचने और इस अवैध तस्करी नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

इंडियन टेंट टर्टल: संवेदनशील और संरक्षित प्रजाति

इंडियन टेंट टर्टल एक दुर्लभ प्रजाति है, जो भारत के कई राज्यों में पाई जाती है। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित है। इनके संरक्षण का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना और इन्हें अवैध शिकार से बचाना है। इन कछुओं का अवैध व्यापार गंभीर अपराध माना जाता है और इसमें आरोपी को लंबी सजा का सामना करना पड़ सकता है।

वन विभाग के अनुसार, टर्टल की तस्करी मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में होती है। इसके पीछे प्रमुख कारण हैं:

  1. औषधीय उद्योग – कुछ कछुओं का उपयोग शक्तिवर्धक और पारंपरिक दवाओं के निर्माण में किया जाता है।
  2. मांस और पेट ट्रेड – दुर्लभ प्रजातियों के मांस की मांग भी विदेशी बाजारों में होती है।
  3. पालन-पोषण और सजावटी उद्देश्यों – कुछ लोग इन कछुओं को पालतू या सजावटी उद्देश्यों के लिए खरीदते हैं।
रेलवे के साथ मिलकर चल रही तस्करी

आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि रेलवे के माध्यम से वन्यजीव तस्करी करने की घटनाएँ बढ़ रही हैं। विशेषकर लंबी दूरी की एक्सप्रेस और मेल ट्रेनों में यह काम किया जाता है। तस्कर छोटे बैगों और पार्सल के जरिए इन दुर्लभ जानवरों को भेजते हैं। इस मामले में अजय सिंह राजपूत ने स्वीकार किया कि यह उसका पहला मौका नहीं था और कई बार उसे इसी प्रकार की खेप भेजने का काम सौंपा गया।

तस्करी की रोकथाम और भविष्य की योजना

वन विभाग और STF की संयुक्त टीम इस प्रकार की तस्करी रोकने के लिए लगातार निगरानी बढ़ा रही है। रेलवे स्टेशन पर और अधिक चेकिंग और निगरानी बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत लंबी सजा हो सकती है।

यात्रियों और स्थानीय लोगों में चर्चा

Bhopal के संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन पर इतने दुर्लभ कछुओं के मिलने की खबर फैलते ही यात्रियों और स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बन गई। कई लोग इस कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं और वन्यजीवों की सुरक्षा के महत्व पर जोर दे रहे हैं।

निष्कर्ष

Bhopal  में 311 दुर्लभ इंडियन टेंट टर्टल कछुओं की तस्करी का मामला वन्यजीव संरक्षण और रेलवे सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीर है। आरपीएफ और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ कि तस्करी नेटवर्क को तोड़ना और दुर्लभ प्रजातियों को सुरक्षित रखना संभव है। STF अब मुख्य आरोपी रवींद्र कश्यप की तलाश में जुटा है।

इस मामले से यह संदेश भी मिलता है कि वन्यजीव तस्करी न केवल अपराध है, बल्कि प्राकृतिक संतुलन और जैव विविधता के लिए भी खतरा है। सरकार और वन विभाग इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं ताकि भारत की दुर्लभ प्रजातियाँ सुरक्षित रह सकें।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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