आस्था की राह पर 3000 किलोमीटर: चेन्नई से नाडोल आशापुरा माताजी धाम के लिए पैदल यात्रा शुरू
ढोल-नगाड़ों और माता के जयकारों के बीच श्रद्धालु रवाना, करीब 60 दिन में नाडोल धाम पहुंचने का लक्ष्य
चेन्नई। के. विक्रम सुराणा। आस्था और श्रद्धा की अनूठी मिसाल पेश करते हुए चेन्नई से राजस्थान के प्रसिद्ध श्री नाडोल आशापुरा माताजी धाम के लिए करीब 3000 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा का शुभारंभ हुआ। आशापुरा माताजी के भक्त पिंटू भाई जावाल, राजू भाई सवणा और मनीष भाई माली ओड़ा ने सुबह चेन्नई से नाडोल धाम के लिए पदयात्रा शुरू की।
पदयात्रा के शुभारंभ अवसर पर चेन्नई के माली समाज एवं आशापुरा माताजी के भक्त बड़ी संख्या में मौजूद रहे। ढोल-नगाड़ों और माता के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने पदयात्रियों को उत्साहपूर्वक विदाई दी। इस अवसर पर माली समाज की ओर से यात्रियों का स्वागत किया गया और आशापुरा माताजी की भव्य आरती का आयोजन भी हुआ।
सुबह 8 बजे शुरू हुई यात्रा
पदयात्री पिंटू भाई जावाल ने बताया कि पैदल यात्रा का प्रस्थान सुबह करीब 8 बजे हुआ। यात्रा के पहले दिन पुनमवली में रात्रि विश्राम किया जाएगा। इसके बाद यात्री निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते हुए नाडोल स्थित आशापुरा माताजी धाम पहुंचेंगे।
पदयात्रियों के अनुसार चेन्नई से नाडोल धाम की दूरी करीब 3000 किलोमीटर है। इस दूरी को पैदल तय करने में लगभग 60 दिन का समय लगने की संभावना है। लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा होने के बावजूद श्रद्धालुओं में इसे लेकर उत्साह और विश्वास बना हुआ है।
माता के जयकारों से गूंजा वातावरण
यात्रा शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं ने आशापुरा माताजी की पूजा-अर्चना की और भव्य आरती में भाग लिया। इसके बाद माता के जयकारों और भक्तिमय वातावरण के बीच पदयात्री नाडोल धाम की ओर रवाना हुए।
माली समाज के लोगों ने पदयात्रियों का स्वागत कर उनकी सफल यात्रा की कामना की। इस दौरान बड़ी संख्या में समाजजन एवं माताजी के भक्त उपस्थित रहे। भक्तों ने यात्रियों का उत्साह बढ़ाते हुए माता से उनकी यात्रा निर्विघ्न पूरी होने की प्रार्थना की।

आस्था और संकल्प का सफर
चेन्नई से नाडोल तक की 3000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा केवल दूरी तय करने का प्रयास नहीं, बल्कि श्रद्धा, संकल्प और भक्ति का प्रतीक है। यात्रियों को रास्ते में अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन आशापुरा माताजी के प्रति उनकी आस्था उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।
यात्रियों का उद्देश्य नाडोल पहुंचकर आशापुरा माताजी के दर्शन, पूजा-अर्चना और आराधना करना है। करीब दो महीने तक चलने वाली इस पदयात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर पड़ाव और रात्रि विश्राम किया जाएगा।
श्री सुराणा आशापुरा माताजी पैदल संघ ने दी शुभकामनाएं
श्री सुराणा आशापुरा माताजी पैदल संघ नाडोल-सोनाणा के मुख्य सदस्य के. विक्रम सुराणा एवं समस्त ग्रुप की ओर से पदयात्रियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी गईं।
उन्होंने आशापुरा माताजी से प्रार्थना करते हुए कहा कि माता के आशीर्वाद से पदयात्रा निर्विघ्न रूप से पूरी हो और सभी यात्री स्वस्थ एवं सुरक्षित नाडोल धाम पहुंचें।
संघ की ओर से कहा गया कि श्रद्धा और विश्वास के साथ शुरू की गई यह यात्रा समाज में धार्मिक आस्था और एकजुटता का संदेश भी देती है।
समाज की एकजुटता भी आई नजर
पदयात्रा के शुभारंभ अवसर पर माली समाज के लोगों ने जिस उत्साह के साथ यात्रियों का स्वागत किया, उससे समाज की एकजुटता और धार्मिक आस्था का भाव देखने को मिला। यात्रा के दौरान भी विभिन्न स्थानों पर समाजजनों और श्रद्धालुओं द्वारा पदयात्रियों के सहयोग की उम्मीद है।
पदयात्रियों ने आशापुरा माताजी का स्मरण कर यात्रा प्रारंभ की और माता से अपने संकल्प की सफलता के लिए प्रार्थना की।
करीब 3000 किलोमीटर का यह सफर लगभग 60 दिनों में पूरा करने के लक्ष्य के साथ शुरू हुआ है। अब पदयात्री चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ते हुए नाडोल धाम पहुंचेंगे और वहां आशापुरा माताजी के दर्शन कर अपनी यात्रा पूर्ण करेंगे।

माता के जयकारों और श्रद्धा के संकल्प के साथ शुरू हुई यह पदयात्रा अब नाडोल धाम की ओर बढ़ रही है। श्रद्धालुओं को विश्वास है कि आशापुरा माताजी की कृपा से यह कठिन यात्रा सफलतापूर्वक पूरी होगी।
