3 Presidents ने ठुकराया, चौथे ने माना: ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री का बड़ा खुलासा
अमेरिकी राजनीति और पश्चिम एशिया की रणनीति को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने दावा किया है कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लंबे समय से अमेरिका से ईरान पर सैन्य कार्रवाई की मांग करते रहे हैं, लेकिन कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इसे खारिज कर दिया।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है और वैश्विक कूटनीति एक नाजुक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
3 Presidents ने किया इनकार
पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने खुद कई मौकों पर यह देखा कि नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की मांग रखी।
केरी के अनुसार, इजराइली प्रधानमंत्री ने अलग-अलग समय पर अमेरिका के तीन राष्ट्रपतियों से यह आग्रह किया:
- जॉर्ज डब्लू बुश
- बराक ओबामा
- जो बाइडन
लेकिन इन सभी नेताओं ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।
इन अमेरिकी राष्ट्रपतियों का मानना था कि ईरान पर सीधा सैन्य हमला क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
ओबामा से लेकर बाइडन तक लगातार विरोध
केरी ने कहा कि बराक ओबामा के कार्यकाल में इस मुद्दे पर कई गंभीर चर्चाएं हुईं, लेकिन अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाए रखी।
इसी तरह, जो बाइडन प्रशासन ने भी ईरान के खिलाफ सीधे युद्ध के विचार को खारिज कर दिया। उनका फोकस कूटनीति और परमाणु समझौतों को फिर से मजबूत करने पर रहा।
ट्रंप के दौर में बदला रुख
केरी के बयान के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में स्थिति अलग रही। उनके अनुसार, ट्रंप ने कुछ स्तर पर इजराइल के रुख के प्रति सहमति दिखाई थी, हालांकि इसका पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
इसी पृष्ठभूमि में यह चर्चा और तेज हो गई है कि क्या अमेरिका की नीति में समय के साथ बड़ा बदलाव आया है।
Donald Trump
नेतन्याहू की कथित “चार सूत्री योजना”
जॉन केरी ने यह भी दावा किया कि नेतन्याहू केवल हमले की बात नहीं कर रहे थे, बल्कि उनके पास एक विस्तृत रणनीतिक योजना भी थी, जिसे उन्होंने “चार सूत्री पिच” कहा।
इस योजना के चार मुख्य बिंदु बताए गए:
- ईरान के नेतृत्व को कमजोर करना
- सत्ता परिवर्तन की संभावना बनाना
- सैन्य ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचाना
- पूरे मध्य पूर्व की रणनीतिक स्थिति बदल देना
Benjamin Netanyahu
क्यों खारिज हुआ प्रस्ताव?
अमेरिकी नीति विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के सैन्य प्रस्ताव को बार-बार खारिज किए जाने के पीछे कई कारण थे:
- क्षेत्रीय युद्ध फैलने का खतरा
- वैश्विक तेल बाजार पर असर
- अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा
- ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई
इन कारणों से अमेरिका की पिछली सरकारों ने सीधे युद्ध से दूरी बनाए रखी।
जॉन केरी का दावा क्यों अहम?
जॉन केरी का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वे खुद अमेरिकी विदेश नीति के उच्च स्तर पर रह चुके हैं और कई अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं का हिस्सा रहे हैं।
उनके इस खुलासे ने एक बार फिर यह बहस शुरू कर दी है कि क्या पश्चिम एशिया की वर्तमान अस्थिरता पुराने राजनीतिक निर्णयों और रणनीतिक मतभेदों का परिणाम है।
John Kerry
ईरान युद्ध पर लंबे समय से चल रहा तनाव
ईरान और इजराइल के बीच तनाव कई दशकों से चला आ रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में यह और बढ़ गया है। अमेरिका की भूमिका इस पूरे विवाद में हमेशा निर्णायक रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी समय अमेरिका ने सीधे सैन्य हस्तक्षेप किया होता, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता था।
इस्लामाबाद वार्ता से जुड़ता नया संदर्भ
यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण बातचीत चल रही है। इस वार्ता को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि पुराने निर्णय और रणनीतिक असहमति आज की वार्ता को भी प्रभावित कर सकती है।
क्या बदलेगा पश्चिम एशिया का भविष्य?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह खुलासा भविष्य की कूटनीति को प्रभावित करेगा या यह सिर्फ इतिहास के एक और विवादित अध्याय के रूप में देखा जाएगा।
अगर ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले समय में क्षेत्रीय स्थिरता और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
निष्कर्ष
जॉन केरी का यह बयान सिर्फ एक खुलासा नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया की जटिल राजनीति की गहरी परतों को उजागर करता है। तीन Presidents द्वारा सैन्य कार्रवाई से इनकार और एक के कार्यकाल में सहमति की चर्चा ने वैश्विक रणनीति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या यह ऐतिहासिक तनाव किसी समाधान की ओर बढ़ेगा या आने वाले समय में और गहरा होगा।
