देसी गाय के गोबर से साकार हुए 2500 गणपति, आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
दैनिक स्वराज वाणी संवाददाता जिला ब्यूरो चीफ गौतम साल्वे मंडलेश्वर
मंडलेश्वर की माधव न्यास गौशाला की अनूठी पहल, उज्जैन-इंदौर समेत कई शहरों तक पहुंचीं प्राकृतिक गणेश प्रतिमाएं
मंडलेश्वर। गणेशोत्सव में धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण और गौसेवा का संदेश देने के उद्देश्य से माधव न्यास गौशाला मंडलेश्वर की अनूठी पहल लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। गौशाला में पिछले तीन वर्षों से देसी गाय के गोबर से भगवान गणेश की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इस वर्ष यहां करीब 2500 गणेश प्रतिमाओं का निर्माण किया गया है, जिन्हें मंडलेश्वर के अलावा उज्जैन, इंदौर, खंडवा सहित अन्य स्थानों पर भेजा गया है।
गौशाला की इस पहल में धार्मिक भावना के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश भी जुड़ा है। देसी गाय के गोबर से तैयार इन गणेश प्रतिमाओं में प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। गणेशोत्सव के बाद इनके विसर्जन से प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से होने वाले जल प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।
धार्मिक मान्यता से जुड़ी है पहल
गौशाला से जुड़े लोगों के अनुसार, भगवान गणेश के प्राकट्य से संबंधित धार्मिक मान्यताओं से प्रेरणा लेकर इन प्रतिमाओं का निर्माण किया जा रहा है। मान्यता है कि माता पार्वती ने गाय के गोबर और उबटन से भगवान गणेश का स्वरूप तैयार किया था और उसमें प्राण प्रतिष्ठित किए थे।
इसी धार्मिक भावना को आधार बनाकर गौशाला में देसी गाय के गोबर से गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इस पहल के जरिए श्रद्धालुओं तक भगवान गणेश की भक्ति के साथ गौसेवा और प्राकृतिक जीवनशैली का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
जलस्रोतों के लिए भी अनुकूल विकल्प
गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान जलस्रोतों में प्रदूषण एक बड़ी चिंता रहती है। प्लास्टर ऑफ पेरिस और कृत्रिम रंगों से बनी प्रतिमाओं के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसके मुकाबले प्राकृतिक सामग्री से बनी गणेश प्रतिमाएं पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल विकल्प मानी जाती हैं।
गौशाला प्रबंधन का कहना है कि घर-घर पहुंचने वाली इन प्रतिमाओं के माध्यम से लोगों को गौवंश के महत्व के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
कई शहरों तक पहुंचा संदेश
माधव न्यास गौशाला में तैयार की गई करीब 2500 गणेश प्रतिमाओं को मंडलेश्वर के साथ उज्जैन, इंदौर, खंडवा और अन्य क्षेत्रों में भी भेजा गया है। इससे गौशाला की इस पहल का दायरा मंडलेश्वर से बाहर तक पहुंचा है।
गणेशोत्सव के दौरान गौशाला की यह पहल श्रद्धालुओं को यह संदेश दे रही है कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। देसी गाय के गोबर से तैयार गणेश प्रतिमाओं के जरिए गौसेवा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को घर-घर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
दैनिक स्वराज वाणी संवाददाता
जिला ब्यूरो चीफ गौतम साल्वे, मंडलेश्वर
