Indore शिक्षा विभाग में 2.86 करोड़ के गबन का मामला: दूसरा आरोपी भी गिरफ्तार, जांच में बड़े खुलासे
Indore के स्कूली शिक्षा विभाग में सामने आए करोड़ों रुपये के वित्तीय गबन मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस केस में अब तक दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं, जिससे विभागीय लापरवाही और संभावित मिलीभगत पर भी सवाल उठ रहे हैं।
यह पूरा मामला Indore विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय से जुड़ा है, जहां 2.86 करोड़ रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। जांच के दौरान सामने आया कि सरकारी फंड को फर्जी तरीके से कई बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया और बाद में उसका दुरुपयोग किया गया।
दूसरा आरोपी भी गिरफ्तार
पुलिस ने गुरुवार को इस मामले में दूसरे आरोपी पवन खामोद को गिरफ्तार कर लिया है। वह शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कम्पेल में भृत्य के पद पर कार्यरत था। इससे पहले बुधवार को सिद्धार्थ जोशी नामक भृत्य को गिरफ्तार किया गया था, जो खजराना स्थित शासकीय विद्यालय में पदस्थ था।
पवन खामोद की गिरफ्तारी के साथ ही अब तक इस मामले में कई अहम कड़ियां जुड़ गई हैं। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों की भूमिका गबन की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और उसे छिपाने में रही है।
13 लोगों के खिलाफ केस दर्ज
इस पूरे मामले में पुलिस ने कुल 13 लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। इनमें अतिथि शिक्षक, भृत्य, सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी और अन्य लोग शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपियों ने मिलकर 33 अलग-अलग बैंक खातों में सरकारी राशि ट्रांसफर की थी।
इन खातों में दो करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई, जिसे बाद में विभिन्न तरीकों से निकाला गया। पुलिस ने इन सभी बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है ताकि आगे की जांच प्रभावित न हो।
मुख्य आरोपी सिद्धार्थ जोशी की भूमिका
गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी सिद्धार्थ जोशी पर गंभीर आरोप हैं। जांच में पता चला है कि उसके पास बीईओ और अकाउंटेंट के लॉगिन आईडी और पासवर्ड थे, जिनका दुरुपयोग कर उसने सरकारी खातों से पैसे ट्रांसफर किए।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जोशी ने इस फर्जीवाड़े से हासिल लगभग 1.75 करोड़ रुपये अपनी पत्नी और बेटी के बैंक खातों में जमा कर दिए थे। इन खातों को भी जांच के दायरे में लाया गया है और उन्हें सह-आरोपी बनाया गया है।
2009 से नौकरी में था आरोपी
सिद्धार्थ जोशी 2009 से शिक्षा विभाग में कार्यरत था। लंबे समय से विभाग में होने के कारण उसे सिस्टम की पूरी जानकारी थी, जिसका उसने कथित तौर पर दुरुपयोग किया। पुलिस का मानना है कि यह गबन एक सुनियोजित तरीके से कई वर्षों तक किया गया।
जांच में अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस घोटाले में केवल निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है। इस दौरान इंदौर विकासखंड शिक्षा कार्यालय में पदस्थ रहे कई अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
वर्तमान और पूर्व अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वित्तीय लेनदेन की निगरानी में कोई लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई।
सरकारी फंड में हेराफेरी का तरीका
जांच में सामने आया है कि छात्रवृत्ति, जीपीएफ और अन्य सरकारी मदों की राशि में हेराफेरी की गई। 2018 से इस तरह की अनियमितताएं जारी थीं, लेकिन प्रारंभिक तौर पर इन्हें पकड़ पाना मुश्किल रहा।
भोपाल स्थित आईटी सेल की जांच के दौरान इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ, जिसके बाद पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।
कलेक्टर के आदेश पर कार्रवाई
Indore कलेक्टर शिवम वर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई शुरू की और एक-एक कर आरोपियों को गिरफ्तार किया।
आगे की जांच जारी
पुलिस अब बाकी फरार आरोपियों की तलाश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गबन में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की गहन जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
निष्कर्ष
Indore शिक्षा विभाग में सामने आया यह 2.86 करोड़ रुपये का गबन मामला न केवल वित्तीय अनियमितता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह सरकारी सिस्टम में लंबे समय तक चलने वाली लापरवाही बड़े घोटाले का रूप ले सकती है।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
