देश का सबसे बड़ा रेल फ्लाईओवर तैयार होने की कगार पर: 1800 करोड़ की कटनी ग्रेड सेपरेटर परियोजना से MP–CG रूट पर दौड़ेंगी नई ट्रेनें
मध्य प्रदेश में रेलवे विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए कटनी ग्रेड सेपरेटर परियोजना तेजी से अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ रही है। करीब 1800 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल प्रदेश के लिए एक उपलब्धि है, बल्कि भारत के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में भी एक नया अध्याय जोड़ने वाला है। यह परियोजना भविष्य में देश का सबसे बड़ा और सबसे लंबा रेलवे वायाडक्ट बनने जा रही है, जो आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क को नई मजबूती देगा।
देश का सबसे लंबा रेलवे वायाडक्ट – 33.40 किमी की मेगा परियोजना
कटनी ग्रेड सेपरेटर परियोजना की कुल लंबाई 33.40 किमी है, जिसमें दो अलग-अलग स्ट्रक्चर शामिल हैं—
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डाउन ग्रेड सेपरेटर – 17.52 किमी
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अप ग्रेड सेपरेटर – 15.35 किमी
इन दोनों को मिलाकर यह पूरा निर्माण भारत का सबसे लंबा रेलवे वायाडक्ट बनाता है। निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर भारी तकनीकी स्ट्रक्चर बनाए गए हैं क्योंकि यह परियोजना अत्यधिक व्यस्त रेल मार्ग पर रेल ट्रैफिक को बिना बाधित किए खड़ी की जा रही है।
अप लाइन पर निर्माण कार्य लगभग पूरा
अप साइड पर अब तक—
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1570 फाउंडेशन
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264 पियर्स
का निर्माण पूरा किया जा चुका है। अप्रैल में कटंगी खुर्द–न्यू मझगवां सेक्शन के बीच सफल परीक्षण के बाद अप लाइन पर मालगाड़ियों का परिचालन भी शुरू हो चुका है। नियमित मालगाड़ियाँ इस ट्रैक से गुजर रही हैं, जिससे परियोजना की उपयोगिता पहले ही सिद्ध हो चुकी है।
डाउन साइड पर प्रगति धीमी – 2026 तक पूरा होने का अनुमान
डाउन ट्रैक की 17.52 किमी लंबी लाइन पर निर्माण कार्य अपेक्षा से धीमा है। अब भी कई स्थानों पर पिलर्स का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।
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2592 फाउंडेशन
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425 पियर्स
अब तक बनाए जा चुके हैं, लेकिन शेष कार्य में समय लग रहा है।
इंजीनियरिंग टीम के अनुसार, डाउन लाइन को इस वर्ष पूरा कर पाना संभव नहीं, और इसके 2026 तक पूरी तरह तैयार होने की संभावना है। निर्माण एजेंसी की धीमी रफ्तार रेलवे के लिए चुनौती बनी हुई है।
स्थानीय ट्रेन सेवाएँ प्रभावित – इन ट्रेनों पर पड़ेगा असर
ग्रेड सेपरेटर की कनेक्टिविटी के लिए रेलवे ब्लॉक लिया जा रहा है, जिसका सीधा असर स्थानीय ट्रेनों पर पड़ेगा। कटनी–बिलासपुर और कटनी–बरगवां सेक्शन की कुछ ट्रेनें प्रभावित रहेंगी।
27 नवंबर से 2 दिसंबर तक यह दो मेमू ट्रेनें कटंगी खुर्द से ही चलेंगी—
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68747/48 बिलासपुर–कटनी–बिलासपुर मेमू
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61603/04 कटनी–बरगवां–कटनी मेमू
यह ट्रेनें कटनी से नहीं होकर कटंगी खुर्द स्टेशन से शुरू और समाप्त होंगी।
कटनी–चिरमिरी पैसेंजर ट्रेन भी प्रभावित
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61609 कटनी–चिरमिरी : 26 नवंबर–2 दिसंबर तक रद्द
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61602 चिरमिरी–कटनी : 27 नवंबर–3 दिसंबर तक रद्द
इन परिवर्तनों के कारण कुछ दिनों तक यात्रियों को असुविधा हो सकती है, इसलिए रेलवे ने पहले से सूचना जारी की है।
परियोजना के पूर्ण होने पर मिलने वाले बड़े लाभ
कटनी ग्रेड सेपरेटर सिर्फ एक क्षेत्रीय परियोजना नहीं है बल्कि मध्य भारत के रेल नेटवर्क की रीढ़ बनने जा रहा है। इसके शुरू होने से कई बड़े फायदे मिलेंगे—
1. मालगाड़ियों की रफ्तार और क्षमता बढ़ेगी
बीना–कटनी रेलखंड पर अत्यधिक भीड़ रहती है, जिससे मालगाड़ी संचालन प्रभावित होता है। नई लाइन के बाद
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ट्रेनों की स्पीड बढ़ेगी
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अधिक मालगाड़ियाँ एक साथ चलाई जा सकेंगी
2. कटनी–बिलासपुर–सिंगरौली को मिलेगा वैकल्पिक रूट
यह वायाडक्ट इन तीन प्रमुख खंडों को एक नई लाइफलाइन देगा, जिससे माल एवं यात्री ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
3. व्यस्त जंक्शन का दबाव कम होगा
कटनी मुड़वारा और न्यू कटनी जंक्शन देश के सबसे व्यस्त रेल सेक्शनों में आते हैं। नई लाइन—
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क्रॉसिंग लेवल कम करेगी
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ट्रेन मूवमेंट को तेज़ और व्यवस्थित करेगी
4. मालगाड़ियों की यात्रा अवधि कम होगी
फ्रेट ट्रैफिक तेज़ होने से माल ढुलाई सस्ती व तेज होगी। इससे व्यापार, खनन, उद्योग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा लाभ मिलेगा।
5. पश्चिम मध्य रेलवे की आय में बढ़ोतरी
ट्रैफिक क्षमता बढ़ने से
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फ्रेट लोडिंग बढ़ेगी
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राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी
रेलवे के अनुसार यह परियोजना अगले वर्षों में पश्चिम मध्य रेलवे की आय को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।
कटनी और मध्य प्रदेश के लिए गेम-चेंजर परियोजना
यह परियोजना न केवल कटनी को, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश को रेल मानचित्र पर एक नई पहचान देगी।
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यह देश के सबसे बड़े स्टील और कोल रूट के लिए वरदान है।
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छत्तीसगढ़–मध्य प्रदेश रेल कनेक्टिविटी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
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आने वाले वर्षों में इस मार्ग पर नई ट्रेनों के संचालन का रास्ता साफ होगा।
MP–CG रूट पर नई ट्रेनों के चलने, रफ्तार बढ़ने और फ्रेट ट्रैफिक में सुधार का यह सबसे बड़ा आधार बनने वाला है।


