18 वर्षों बाद संजीत में त्रिस्तुतिक मुनि भगवंतों का मंगल पदार्पण
संजीत (ब्रजेश बोहरा)
धर्म, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम संजीत में देखने को मिला, जब लगभग 18 वर्षों बाद त्रिस्तुतिक संघ के मुनि भगवंतों का पावन पदार्पण संपन्न हुआ। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में धर्ममय वातावरण व्याप्त हो गया और संजीत श्री संघ में मंगल परमरस प्रवेश अत्यंत हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
मुनि भगवंतों का स्वागत और भव्य प्रवेश जुलूस
राष्ट्रसंत पुण्यसम्राट् गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के शिष्यरत्न द्विशतावधानी मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. और मुनिराज श्री पवित्ररत्न विजयजी म.सा. का संजीत में स्वागत तरूण परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष यश बाफना तथा श्री संघ के सदस्यों ने किया।
सोमवार, 15 दिसम्बर को प्रातःकाल भव्य प्रवेश जुलूस रत्नराज ट्रेडर्स से प्रारंभ होकर संजीत के मुख्य मार्गों से होता हुआ चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन मंदिर पहुँचा।
मार्ग में ग्रामवासियों ने फलक-पावड़े बिछाकर और गहुलियाँ अर्पित कर मुनि भगवंतों का भावपूर्ण स्वागत किया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह से धार्मिक उल्लास और श्रद्धा से ओतप्रोत दिखाई दिया।
मंदिर में परमरस प्रवचन और धर्ममय अनुभव
जैन स्थानक, संजीत में मुनिराज श्री ने परमरस प्रवचन दिए, जिनसे संघजन और श्रद्धालुओं को परमात्मा की वाणी और गुरुदेव की अमृतवाणी का लाभ प्राप्त हुआ। प्रवचनों ने उपस्थित लोगों को अत्यधिक प्रभावित किया और संघजनों ने मुनिराज श्री से शीघ्र पुनः पधारने की विनती की।
स्वागत समारोह और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
धर्मसभा में मंगलाचरण और स्वागत गीत भावना बाफना, रश्मि बाफना, नेहा बाफना एवं सुरभि बाफना द्वारा प्रस्तुत किए गए। वहीं निविद बाफना ने गुरुदेव का मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
इस पावन अवसर पर संजीत श्री संघ के प्रमुख सदस्य जैसे—
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अशोक बाफना
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कैलाश बाफना
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राजेंद्र बाफना
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मनीष बाफना
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देवेंद्र बाफना
साथ ही संजीत सकल श्री संघ अध्यक्ष शरद जैन, सचिव पारसमल जैन, अन्य वरिष्ठ सदस्य और ग्रामवासियों की श्रावक-श्राविकाओं की भी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का संचालन तरूण परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष यश बाफना ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन परिषद के मनीष बाफना द्वारा किया गया।
धर्म, भक्ति और सामूहिक उत्साह का मिलन
मंगल पदार्पण समारोह ने संजीत को धर्म, भक्ति और उल्लास का केंद्र बना दिया। 18 वर्षों बाद मुनि भगवंतों का आगमन, त्रिस्तुतिक संघ की गरिमा और धार्मिक संदेश को पुनः जीवंत करने वाला अवसर रहा।

श्रद्धालुओं और संघजनों ने मुनिराज श्री की शिक्षाओं और प्रवचनों को आत्मसात किया। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने भी इस अवसर पर भाग लेकर धार्मिक और सामाजिक एकता का संदेश दिया।
धार्मिक और सामाजिक महत्व
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यह समारोह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि स्थानीय समुदाय में एकता और समरसता का भी प्रतीक रहा।
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मुनि भगवंतों के प्रवचन ने सच्चाई, संयम और साधुता के मार्ग को प्रोत्साहित किया।
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आयोजन ने संजीत क्षेत्र में धार्मिक जागरूकता और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा दिया।
कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियाँ
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त्रिस्तुतिक संघ के मुनि भगवंतों का 18 वर्षों बाद पहला पावन पदार्पण।
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संजीत के प्रमुख मार्गों में भव्य जुलूस और ग्रामवासियों का भावपूर्ण स्वागत।
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जैन स्थानक में मुनिराज श्री के परमरस प्रवचन, जिससे संघजन प्रभावित हुए।
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धार्मिक गीत, मंगलाचरण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्सव का रंग।
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संपूर्ण क्षेत्र में धर्ममय और उल्लासपूर्ण वातावरण का सृजन।
निष्कर्ष
18 वर्षों बाद त्रिस्तुतिक संघ के मुनि भगवंतों का संजीत आगमन धर्म, भक्ति और उल्लास का अद्वितीय अनुभव लेकर आया। यह आयोजन संजीत क्षेत्र में धार्मिक चेतना और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक बन गया।
संपूर्ण कार्यक्रम ने स्थानीय जनों, संघजनों और युवाओं में धार्मिक भावना और श्रद्धा की नवजीवन शक्ति भर दी। मुनि भगवंतों के प्रवचन और मार्गदर्शन ने लोगों को सदाचार, संयम और आध्यात्मिक जीवन के महत्व को महसूस कराया।
इस पावन अवसर ने यह स्पष्ट कर दिया कि त्रिस्तुतिक संघ और मुनि भगवंतों का मार्गदर्शन संजीत सहित पूरे क्षेत्र के लिए धर्म और भक्ति का अमूल्य उपहार है।
