15 किलोमीटर पैदल चलकर परंपरागत निशान चढ़ाकर माता बिजासन को किया नमन
हरियाली अमावस्या पर सुल्तानिया से भैंसवा माताजी तक निकली भव्य निशान यात्रा, हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में लगाई आस्था की अरदास
भैंसवा माताजी। हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर माता बिजासन धाम भैंसवा माताजी में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। ग्राम सुल्तानिया के ग्रामीणों ने अपनी वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए करीब 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर माता बिजासन के दरबार में परंपरागत निशान और धर्म ध्वजा चढ़ाई। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण माता के जयकारे लगाते हुए यात्रा में शामिल हुए।
ग्राम सुल्तानिया से शुरू हुई यह निशान यात्रा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक भी बनी। ग्रामीणों ने अपने पूर्वजों द्वारा शुरू की गई परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सावन माह की हरियाली अमावस्या के अवसर पर माता बिजासन धाम पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
ग्राम देवताओं की पूजा के बाद शुरू हुई यात्रा
परंपरा के अनुसार निशान यात्रा शुरू करने से पहले ग्राम सुल्तानिया में सभी ग्राम देवताओं की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने माता बिजासन के लिए यात्रा शुरू की। करीब 100 फीट लंबी लकड़ी के भारी-भरकम निशान पर विशाल धर्म ध्वजा लगाई गई थी।
श्रद्धालुओं ने इस निशान को अपने कंधों पर उठाया और माता की भक्ति में लीन होकर पैदल यात्रा की। पूरे रास्ते माता बिजासन के जयकारों और ढोल की थाप से वातावरण भक्तिमय बना रहा। ग्रामीण उत्साह और श्रद्धा के साथ निशान को लेकर आगे बढ़ते रहे।
यात्रा में बुजुर्गों से लेकर युवा और अन्य ग्रामीण भी शामिल हुए। कई श्रद्धालु पूरी यात्रा के दौरान माता के भजनों और जयकारों के साथ आगे बढ़ते रहे।
कई गांवों से होकर पहुंचा निशान
ग्राम सुल्तानिया से शुरू हुई निशान यात्रा विभिन्न गांवों और मार्गों से होकर माता बिजासन धाम भैंसवा माताजी पहुंची। श्रद्धालु पट्टी, धामन्दा, घटिया, लौटिया और अरनिया होते हुए माता के दरबार तक पहुंचे।
लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद श्रद्धालुओं ने माता बिजासन मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद विशेष धार्मिक विधि के साथ निशान की पूजा की गई।
इसके पश्चात पटेल परिवार की ओर से पूजन की प्रक्रिया पूरी की गई और माता बिजासन मंदिर पर परंपरागत धर्म ध्वजा एवं निशान चढ़ाया गया। निशान चढ़ाए जाने के साथ ही श्रद्धालुओं ने माता के जयकारे लगाए और सुख-समृद्धि तथा क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
पूर्वजों की परंपरा का किया निर्वहन
ग्राम सुल्तानिया के ग्रामीणों के अनुसार, माता बिजासन के दरबार में निशान चढ़ाने की यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। हरियाली अमावस्या के अवसर पर ग्रामीण इस धार्मिक परंपरा को पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाते हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि यह परंपरा उनके पूर्वजों से चली आ रही है और नई पीढ़ी भी इसे उसी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही है। हर वर्ष निशान यात्रा में ग्रामीणों की भागीदारी इसे और भव्य रूप देती जा रही है।
इस आयोजन के माध्यम से ग्रामीणों ने धार्मिक परंपरा को जीवित रखने के साथ ही समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी दिया।
यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण हुए शामिल
निशान यात्रा में ग्राम सुल्तानिया के वरिष्ठ नागरिकों के साथ समाजसेवी और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने पूरे रास्ते अनुशासन और श्रद्धा के साथ यात्रा पूरी की।
यात्रा के दौरान जगह-जगह ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने माता के जयकारे लगाए। ढोल की थाप और धार्मिक जयघोष से पूरा मार्ग भक्तिमय नजर आया।
15 किलोमीटर की पैदल यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। लंबी दूरी और भारी निशान के बावजूद भक्तों की आस्था और उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आई।
आसपास के गांवों से भी पहुंचे श्रद्धालु
हरियाली अमावस्या के अवसर पर केवल ग्राम सुल्तानिया से ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों से भी श्रद्धालु माता बिजासन के दरबार में पहुंचे।
अरनिया, बिलोदा पाल सहित आसपास के सैकड़ों गांवों से श्रद्धालु निशान लेकर मंदिर पहुंचे। अलग-अलग गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता बिजासन की पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं माता के चरणों में अर्पित कीं।
मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचे। हरियाली अमावस्या के कारण धार्मिक स्थल पर विशेष उत्साह और आस्था का वातावरण रहा।
महिलाओं और पुरुषों ने की पूजा-अर्चना
हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर हजारों महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने माता बिजासन के श्रीचरणों में पहुंचकर पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने माता से परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा, खुशहाली और क्षेत्र की उन्नति की कामना की।
माता के मंदिर में श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-अर्चना की और दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों का सिलसिला चलता रहा।
आस्था और परंपरा का संगम बनी निशान यात्रा
ग्राम सुल्तानिया से निकली यह निशान यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ ग्रामीण संस्कृति और परंपरा का भी परिचय देती है। पूर्वजों द्वारा शुरू की गई परंपरा को आज भी ग्रामीण पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।
करीब 100 फीट लंबे निशान को कंधों पर लेकर 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा करना श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को दर्शाता है। यात्रा में शामिल लोगों ने माता बिजासन के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए परंपरा को आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया।
हरियाली अमावस्या पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना दिया। माता के जयकारों और धर्म ध्वजा के साथ श्रद्धालुओं ने माता बिजासन के दरबार में अपनी आस्था अर्पित की।
ग्राम सुल्तानिया से भैंसवा माताजी तक निकली यह निशान यात्रा धार्मिक आस्था, पूर्वजों की परंपरा और ग्रामीण एकता का सुंदर उदाहरण बनी।
