12 महीने में 13 बार रिचार्ज क्यों?”: Raghav Chadha ने राज्यसभा में टेलीकॉम कंपनियों पर उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने बुधवार को राज्यसभा में मोबाइल फोन उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दे को उठाया और टेलीकॉम कंपनियों की प्रैक्टिस पर सवाल खड़े किए। सांसद ने कहा कि आज के समय में मोबाइल फोन सिर्फ एक फैशन या सुविधा नहीं बल्कि एक जरूरी संचार साधन बन गया है। ऐसे में प्रीपेड रिचार्ज की वैधता समाप्त होने पर आउटगोइंग कॉल का बंद होना समझ में आता है, लेकिन इनकमिंग कॉल भी बंद कर देना पूरी तरह गलत है।
Raghav Chadha ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “आज मैंने सदन में प्रीपेड रिचार्ज कराकर अपना फोन चलाने वाले उपभोक्ताओं का मुद्दा उठाया। जब रिचार्ज की वैधता खत्म हो जाती है तब आउटगोइंग कॉल का बंद होना समझ आता है, लेकिन इनकमिंग कॉल भी उसके साथ बंद कर देना उचित नहीं है। ये टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी है, जिस पर रोक लगनी चाहिए। मैंने मांग रखी कि कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल चालू रहनी चाहिए, ताकि देश का आम आदमी राइट टू कम्युनिकेशन खोने के खतरे में न पड़े।”
28 दिन का रिचार्ज क्यों एक अतिरिक्त भार बन गया
सांसद ने रिचार्ज सिस्टम पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अधिकांश टेलीकॉम कंपनियां 30 या 31 दिन के बजाय 28 दिन का रिचार्ज प्लान देती हैं। इसका मतलब है कि साल भर में उपयोगकर्ताओं को 12 बार की जगह 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है। उन्होंने इसे आम लोगों के लिए छिपी हुई लूट की तरह बताया।
सांसद ने स्पष्ट किया, “अगर टेलीकॉम कंपनियों का प्लान सच में मंथली है, तो वैधता 30 या 31 दिन की होनी चाहिए। 28 दिन का प्लान उपभोक्ताओं को अनावश्यक बार रिचार्ज कराने के लिए मजबूर करता है। यह न केवल आर्थिक बोझ बढ़ाता है बल्कि उपभोक्ताओं के लिए असुविधा भी पैदा करता है।”
इनकमिंग बंद होने से होने वाली परेशानियाँ
Raghav Chadha ने बताया कि रिचार्ज न होने पर टेलीकॉम कंपनियां इनकमिंग कॉल भी बंद कर देती हैं, जिससे आम आदमी को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में मोबाइल फोन से जुड़े कार्य केवल कॉल तक सीमित नहीं हैं। बैंकिंग सेवाओं, ओटीपी, सरकारी सेवाओं और अन्य जरूरी कार्यों के लिए मोबाइल आवश्यक हो गया है।
“जब इनकमिंग कॉल भी बंद हो जाती है, तो उपभोक्ताओं का राइट टू कम्युनिकेशन प्रभावित होता है। कई बार लोग जरूरी जानकारियों या सरकारी सेवाओं से कट जाते हैं। इसलिए मैंने सुझाव दिया कि प्रीपेड रिचार्ज खत्म होने पर भी कम से कम एक साल तक इनकमिंग सेवा चालू रहनी चाहिए।”
रिचार्ज प्रणाली में पारदर्शिता की आवश्यकता
सांसद ने टेलीकॉम कंपनियों की पारदर्शिता की कमी को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि उपयोगकर्ताओं को उनके प्लान और वैधता के बारे में सही जानकारी नहीं दी जाती। लोग अक्सर यह नहीं जानते कि उनका रिचार्ज कब खत्म होगा या कितने दिन की वैधता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस पर ध्यान दिया जाए और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की जाए।
मोबाइल आज जरूरी, फैशन नहीं
Raghav Chadha ने इस बात पर जोर दिया कि मोबाइल आज सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि जीवन का अहम हिस्सा बन गया है। “आज मोबाइल के बिना किसी का काम रुक सकता है। लोग बैंकिंग, स्कूल-ऑफिस की जानकारी, सरकारी योजनाओं और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी और रिचार्ज सिस्टम की असमान्य प्रैक्टिस आम आदमी के लिए गंभीर समस्या बन गई है।”
उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि टेलीकॉम कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन न हो।
राज्यसभा में उठाया मुद्दा
AAP सांसद ने राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाकर देशभर के प्रीपेड मोबाइल उपयोगकर्ताओं की समस्या को सामने लाया। उन्होंने सुझाव दिया कि:
- प्रीपेड रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग कॉल कम से कम एक साल तक चालू रहे।
- मंथली प्लान की वैधता 28 दिन की बजाय 30 या 31 दिन की हो।
- टेलीकॉम कंपनियों को अपने प्लान और रिचार्ज वैधता की सटीक जानकारी उपभोक्ताओं को प्रदान करनी चाहिए।
Raghav Chadha का कहना है कि यह केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि संचार का अधिकार और जीवन की सुविधा से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि उपभोक्ताओं के हित में कदम उठाए जाएं और टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाई जाए।
