तिजारा में राष्ट्रीय विमर्श जागृति मंच का 10वां महाधिवेशन सम्पन्न, धार्मिक संस्कारों के प्रसार का आह्वान
मनोज जैन नायक, मुरैना/तिजारा
तिजारा। अतिशय क्षेत्र देहरा-तिजारा स्थित श्री चंद्र तीर्थ मंडपम् में राष्ट्रीय विमर्श जागृति मंच का 10वां महाधिवेशन तथा जिनागम पंथी श्रावक संघ समूह भारत का राष्ट्रीय महाधिवेशन सम्पन्न हुआ। आयोजन भावलिंगी संत दिगंबराचार्य श्री 108 विमर्शसागरजी महामुनिराज के ससंघ 31 पिच्छियों के मंगल सान्निध्य में हुआ। देशभर की विभिन्न शाखाओं के पदाधिकारियों और सदस्यों ने सहभागिता कर धार्मिक, सामाजिक एवं जनसेवा गतिविधियों के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया।
श्रद्धा और अनुशासन के वातावरण में आयोजित महाधिवेशन में धार्मिक चेतना, बच्चों के संस्कार और संगठन की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। आचार्यश्री ने शिक्षा के साथ जैन धर्म के मूल सिद्धांतों तथा कुलाचार की जानकारी अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।
समाज को एकता के सूत्र में बांधते हैं संगठन
आचार्यश्री विमर्शसागर महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्थाएं और संगठन केवल नाम नहीं होते। वे समाज एवं परिवारों को एकता के सूत्र में बांधने और धार्मिक चेतना जागृत करने के माध्यम हैं। संगठनों को अपने कार्यों के माध्यम से इस उद्देश्य को आगे बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जैन समाज लौकिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। इसके साथ धार्मिक संस्कारों और जैन कुलाचार की शिक्षा पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। उनके संबोधन में शिक्षा और धार्मिक मूल्यों को साथ लेकर आगे बढ़ने का संदेश प्रमुख रहा।
बच्चों के लिए धार्मिक प्रशिक्षण शिविर लगाने की प्रेरणा
आचार्यश्री ने देशभर से आए संगठनों को अपने क्षेत्रों में शिविर आयोजित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि इन शिविरों के माध्यम से बच्चों को जैन धर्म के मूल सिद्धांतों, धार्मिक संस्कारों और कुलाचार की शिक्षा प्रदान की जाए।
उन्होंने शिक्षा के साथ संस्कारों की आवश्यकता बताते हुए पदाधिकारियों को इस दिशा में कार्य करने का आह्वान किया। महाधिवेशन में उपस्थित विभिन्न शाखाओं के सदस्यों ने आचार्यश्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया और आगामी गतिविधियों के संबंध में मार्गदर्शन लिया। धार्मिक शिक्षा को संगठनात्मक कार्यों में महत्व देने की बात रखी गई।
जिनदीक्षा के लिए किया निवेदन
महाधिवेशन के दौरान संयम की भावना से जुड़ा विशेष प्रसंग भी सामने आया। संघस्थ क्षुल्लक विश्वाग्र त्यागरजी, क्षुल्लिका विकर्षिता श्री माताजी, सहारनपुर की ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी और एटा की ब्रह्मचारिणी बबली दीदी ने आचार्यश्री के चरणों में भगवती जिनदीक्षा प्रदान करने का निवेदन किया।
आचार्य संघ के सान्निध्य में ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी एवं ब्रह्मचारिणी बबली दीदी की मंगल गोद भराई का अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे महाधिवेशन का भावपूर्ण प्रसंग बताया। इस अवसर पर संयम के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया गया।

शिवपुरी में वर्ष 2007 में हुई थी मंच की स्थापना
राष्ट्रीय विमर्श जागृति मंच की स्थापना वर्ष 2007 में मध्यप्रदेश के शिवपुरी में हुई थी। इसके बाद विभिन्न नगरों में मंच की शाखाओं का विस्तार हुआ। पुरुष एवं महिला शाखाएं देव-शास्त्र-गुरु की भक्ति, सेवा और वैयावृत्ति से जुड़े कार्य कर रही हैं।
मंच की शाखाएं धार्मिक गतिविधियों के साथ सामाजिक एवं जनकल्याणकारी कार्यों में भी सक्रिय हैं। महाधिवेशन में विभिन्न क्षेत्रों से आए पदाधिकारियों की सहभागिता रही। आयोजन ने उन्हें आचार्यश्री के सान्निध्य में मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर दिया।
वर्ष 2022 में बना जिनागम पंथी श्रावक संघ
जिनागम पंथी श्रावक संघ का गठन वर्ष 2022 में राजधानी दिल्ली में युवा साथियों के सक्रिय संगठन के रूप में हुआ था। संगठन जिनाभिषेक सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से धर्मप्रभावना के कार्य कर रहा है।
महाधिवेशन में संघ की शाखाओं के पदाधिकारी एवं सदस्य भी शामिल हुए। उन्होंने आगामी धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया।
पत्रकार और अधिवक्ता की भूमिका पर दिया जोर
आचार्यश्री ने कहा कि हर जिले और प्रत्येक मंच पर जैन समाज का पत्रकार एवं अधिवक्ता होना चाहिए। उन्होंने समाज की बात प्रभावी ढंग से रखने और आवश्यकता पड़ने पर समाजहित में आवाज उठाने वालों की आवश्यकता बताई।
इस अवसर पर भिंड की पत्रकार सोनल जैन को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया गया। संगठनात्मक स्तर पर उन्हें भविष्य में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के संकेत दिए गए, हालांकि किसी पद की औपचारिक घोषणा का उल्लेख नहीं किया गया।

