108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का भव्य शुभारंभ
देव आव्हान, आहुतियों एवं प्रज्ञा पुराण प्रवचन के साथ वातावरण हुआ आध्यात्मिक
नागदा जं. (निप्र) — अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का भव्य एवं दिव्य शुभारंभ नगर में अत्यंत श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। महायज्ञ का प्रारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ देव आव्हान एवं देव पूजन द्वारा किया गया, जिससे संपूर्ण यज्ञशाला एवं आसपास का वातावरण पवित्र और ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।
इस महायज्ञ में नगर नागदा जंक्शन सहित आसपास के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। विशेष रूप से अनेक दम्पत्तियों ने यज्ञ में सहभागिता करते हुए 108 कुण्डों में आहुतियाँ अर्पित कीं तथा विश्व शांति, परिवार की सुख-समृद्धि एवं समाज के कल्याण की कामना की। यज्ञ के दौरान वेद मंत्रों की गूंज, गायत्री महामंत्र का सामूहिक जाप और हवन की पावन अग्नि ने वातावरण को आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत कर दिया।
प्रज्ञा पुराण प्रवचन में जीवन के उद्देश्य पर प्रकाश
सायंकाल 4 बजे से 7 बजे तक शांतिकुंज, हरिद्वार से पधारे परमपूज्य गुरुदेव के प्रतिनिधि एवं टोली नायक श्री परमेश्वर साहू द्वारा प्रज्ञा पुराण का भावपूर्ण दर्शन एवं प्रवचन प्रस्तुत किया गया। अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी वक्तव्य में उन्होंने मनुष्य जीवन के वास्तविक उद्देश्य, आत्मिक उन्नति, नैतिक मूल्यों तथा समाज निर्माण में व्यक्ति की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के लिए नहीं है, बल्कि आत्मिक जागरण, सद्भावना, सेवा और चरित्र निर्माण के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के उत्थान हेतु समर्पित होने के लिए है। प्रज्ञा पुराण के माध्यम से उन्होंने युग निर्माण आंदोलन की भावना को स्पष्ट करते हुए अधिक से अधिक भावनाशील बहन-भाइयों से इस पवित्र अभियान से जुड़ने का आव्हान किया।
आज एवं कल के कार्यक्रमों की रूपरेखा
आयोजन समिति द्वारा जानकारी दी गई कि कार्यक्रम के अंतर्गत आज प्रातः 8 बजे से विधिवत रूप से महायज्ञ का संचालन प्रारंभ होगा। वैदिक विधि-विधान से यज्ञ कर्म संपन्न किए जाएंगे, जिसमें श्रद्धालुओं को आहुतियाँ अर्पित करने का अवसर प्राप्त होगा।
इसी क्रम में कल यज्ञशाला परिसर में एक विशेष एवं अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार — गर्भपूजन संस्कार — का आयोजन किया जाएगा। यह संस्कार भारतीय संस्कृति में गर्भस्थ शिशु के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। आयोजन समिति ने नगर एवं आसपास के क्षेत्रों के सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपने घर की गर्भवती बहनों को प्रातः 9 बजे यज्ञशाला में लेकर आएं और इस पावन गर्भपूजन संस्कार में सम्मिलित होकर पुण्यलाभ प्राप्त करें।
गर्भपूजन संस्कार का महत्व
गर्भपूजन संस्कार के माध्यम से गर्भस्थ शिशु में सद्गुण, संस्कार एवं सकारात्मक ऊर्जा के संचार का उद्देश्य होता है। वैदिक मंत्रों, गायत्री महामंत्र और यज्ञीय वातावरण के प्रभाव से माता के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आयोजन समिति ने बताया कि यह संस्कार भावी पीढ़ी के सशक्त, संस्कारित और जागरूक निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सायंकालीन संगीतमय प्रज्ञा पुराण कार्यक्रम
इसके अतिरिक्त कल सायंकाल 4 बजे से 7 बजे तक पुनः प्रज्ञा पुराण प्रवचन के साथ संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में भजन, संगीत एवं प्रेरणादायी प्रसंगों के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना का प्रसार किया जाएगा। संगीत और प्रवचन के समन्वय से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति होगी।

धर्मप्रेमी नागरिकों से सहभागिता की अपील
आयोजन समिति एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं ने नगर एवं क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमी भाई-बहनों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस पावन आयोजन में सम्मिलित होकर धर्मलाभ प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और सकारात्मक ऊर्जा के प्रसार का माध्यम बनते हैं।
108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह समाज को सद्भाव, शांति, सेवा और आत्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करने का सशक्त प्रयास भी है। श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता यह दर्शाती है कि नगर में आध्यात्मिक चेतना के प्रति गहरी आस्था एवं जुड़ाव है।

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