खरगोन से मां वैष्णो देवी के लिए निकला 100 श्रद्धालुओं का साइकिल जत्था, 1,563 किलोमीटर की यात्रा के साथ 27 वर्षों से निभा रहे अनूठी आस्था की परंपरा
संवाददाता: मनोज कुमार पुष्पद
पड़ाना/खरगोन। सावन और मानसून के बीच धार्मिक आस्था का एक अनूठा उदाहरण मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से सामने आया है। जिले के भीकनगांव नगर से करीब 100 श्रद्धालुओं का जत्था मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए साइकिल यात्रा पर रवाना हुआ है। श्रद्धालु लगभग 1,563 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर जम्मू-कश्मीर स्थित मां वैष्णो देवी धाम पहुंचेंगे। यह कोई पहली यात्रा नहीं है, बल्कि लगातार 27वें वर्ष आयोजित की जा रही इस धार्मिक परंपरा ने अब क्षेत्र की पहचान बना ली है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा केवल व्यक्तिगत मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नहीं, बल्कि देश में सुख-शांति, समृद्धि, अच्छी वर्षा, आपसी भाईचारे और जनकल्याण की कामना के साथ निकाली जाती है। “जय माता दी” और “जयकारा शेरावाली का, बोल सांचे दरबार की जय” के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक अपनी यात्रा प्रारंभ की।
आस्था और संकल्प का अद्भुत संगम
मां वैष्णो देवी की यह साइकिल यात्रा वर्षों से श्रद्धा, अनुशासन और सामूहिक संकल्प का प्रतीक बनी हुई है। यात्रा में शामिल श्रद्धालु बताते हैं कि हजारों किलोमीटर की कठिन दूरी, बारिश, थकान और मौसम की चुनौतियां उनकी आस्था के सामने छोटी पड़ जाती हैं।
इस वर्ष भी भीकनगांव से निकला यह जत्था निर्धारित मार्ग से होते हुए जम्मू-कश्मीर की ओर बढ़ रहा है। श्रद्धालु प्रतिदिन औसतन 110 से 125 किलोमीटर तक साइकिल चलाते हैं और लगभग 16 दिनों में माता के दरबार पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।
तीसरे दिन राजगढ़ जिले के मऊ गांव पहुंचा जत्था
यात्रा के दौरान श्रद्धालु राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-52 से आगे बढ़ते हुए तीसरे दिन राजगढ़ जिले के मऊ गांव पहुंचे।
यहां हाईवे स्थित बाबा रामदेव पंडाल तथा खेड़ापति हनुमान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के ठहरने और रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई। स्थानीय लोगों ने भी यात्रियों का स्वागत कर उनके लिए भोजन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराईं।
श्रद्धालुओं ने विश्राम के बाद अगले पड़ाव की ओर प्रस्थान किया।
27 वर्षों से लगातार जारी है यह धार्मिक परंपरा
यात्रा में शामिल श्रद्धालु सलीम नार्वे ने बताया कि इस अनूठी परंपरा की शुरुआत करीब 27 वर्ष पहले हुई थी। उस समय केवल 11 युवाओं ने साइकिल से मां वैष्णो देवी जाने का संकल्प लिया था।
धीरे-धीरे यह यात्रा लोगों की आस्था का केंद्र बन गई और हर वर्ष इसमें शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती चली गई। आज यह यात्रा लगभग 100 श्रद्धालुओं के विशाल जत्थे के रूप में निकाली जा रही है।
उनका कहना है कि यह यात्रा समाज में प्रेम, सद्भाव, अमन-चैन और धार्मिक एकता का संदेश भी देती है।
पूरे देश की खुशहाली के लिए की जाती है यात्रा
श्रद्धालुओं का कहना है कि वे केवल अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं की पूर्ति के लिए यात्रा नहीं करते।
उनकी मुख्य प्रार्थना होती है—
- देश में सुख-शांति बनी रहे।
- अच्छी वर्षा हो।
- किसानों की फसल अच्छी हो।
- समाज में भाईचारा कायम रहे।
- सभी लोगों के जीवन में समृद्धि आए।
- प्राकृतिक आपदाओं से लोगों की रक्षा हो।
इस बार भी श्रद्धालुओं ने विशेष रूप से प्रदेश और देश में अच्छी बारिश तथा खुशहाली की कामना के साथ यात्रा प्रारंभ की है।
बारिश और लंबी दूरी भी नहीं डिगा पाती श्रद्धा
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को लगातार बदलते मौसम, बारिश, तेज धूप और लंबी दूरी जैसी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
फिर भी उनका उत्साह कम नहीं होता। श्रद्धालु श्याम मासरे ने बताया कि माता रानी के प्रति अटूट विश्वास ही उन्हें हर कठिनाई से आगे बढ़ने की शक्ति देता है।
उन्होंने कहा कि—
“हम केवल अपनी मनोकामनाओं के लिए नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि के लिए मां वैष्णो देवी के दरबार जा रहे हैं।”
उनका कहना है कि थकान शरीर में होती है, लेकिन मन में माता रानी के दर्शन की श्रद्धा उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहती है।
साइकिल यात्रा से पर्यावरण संरक्षण का संदेश
यात्रा की एक विशेष बात यह भी है कि श्रद्धालु मोटर वाहन के बजाय साइकिल का उपयोग करते हैं।
श्रद्धालु सलीम नार्वे के अनुसार—
- साइकिल से ईंधन की बचत होती है।
- वायु प्रदूषण नहीं होता।
- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
- स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश मिलता है।
उनका कहना है कि धार्मिक यात्रा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
युवा पीढ़ी भी जुड़ रही है इस परंपरा से
श्रद्धालुओं ने बताया कि अब नई पीढ़ी भी इस अनूठी यात्रा से प्रेरित होकर जुड़ रही है।
पहले जहां कुछ ही लोग इस यात्रा का हिस्सा बनते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में युवा भी उत्साहपूर्वक इसमें भाग लेते हैं।
इससे यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक भी पहुंच रही है और धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश मजबूत हो रहा है।
सैकड़ों श्रद्धालु हैं यात्रा का हिस्सा
इस वर्ष यात्रा में शामिल प्रमुख श्रद्धालुओं में—
- सलीम नार्वे
- श्याम मासरे
- इंदर सिंह सोनी
- धर्मेंद्र पेंडारे
- सुखराम बामनिया
- सचिन गोलकर
- हीरालाल बारे
- आशीष पेडारे
- राजा करजरे
- रितेश पेडारे
- किशन पेडारे
- अर्जुन पेंडारे
- राहुल चौहान
- डॉलर मंडलोई
- मोंटया पिपराड
सहित लगभग 100 श्रद्धालु शामिल हैं।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक संदेश
श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी माध्यम है।
वे जहां-जहां से गुजरते हैं, वहां लोगों को—
- पर्यावरण संरक्षण,
- आपसी भाईचारे,
- स्वास्थ्य,
- अनुशासन,
- नशामुक्ति,
- सामाजिक सद्भाव
का संदेश भी देते हैं।
आस्था का अनूठा उदाहरण
भीकनगांव से मां वैष्णो देवी तक साइकिल से निकलने वाली यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बन चुकी है।
लगातार 27 वर्षों से बिना किसी रुकावट के जारी यह परंपरा बताती है कि जब आस्था मजबूत हो तो हजारों किलोमीटर का सफर भी आसान लगने लगता है। बारिश, थकान और कठिन रास्तों के बावजूद श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ माता रानी के दरबार तक पहुंचने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
यह यात्रा आज क्षेत्र के लिए प्रेरणा का विषय बन चुकी है और हर वर्ष अधिक से अधिक लोगों को धर्म, सेवा और सामाजिक सद्भाव से जोड़ने का कार्य कर रही है।
