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Nagda से भाटपचलाना तक मुनिभगवंतों का विहार, श्रद्धालुओं में उत्साह

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Published On: 21 February 2026
Nagda

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“क्या आपके धर्म के केन्द्र में आत्मा है?” — प्रत्यक्षरत्न विजयजी

मुनिभगवंतों का नागदा से भाटपचलाना की ओर विहार

Nagda (ब्रजेश बोहरा) – सौधर्म बृहत्तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक Jain श्रीसंघ के युगप्रभावक, पुण्यसम्राट गुरूदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के शिष्य, द्विशतावधानी परमरस मुनिराज प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. एवं मुनिराज पवित्ररत्न विजयजी म.सा. आदि ठाणा जयन्त आराधना भवन, शांतिनाथ जिनालय परिसर और जैन कॉलोनी में विराजमान हैं।

21 फरवरी की प्रातःकालीन धर्मसभा में मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. ने प्रेरक प्रवचन देते हुए कहा कि किसी भी धर्म के केंद्र में आत्मा का होना अत्यंत आवश्यक है। धर्म का वास्तविक सार आत्मकल्याण है। यदि आत्मा की शुद्धि, जागृति और कल्याण ही हमारा लक्ष्य है, तो वही सच्चा और सार्थक धर्म कहलाता है। मुनिराज ने बताया कि आत्मा के बिना धर्म केवल बाहरी रीति-रिवाज बनकर रह जाता है।

धर्म का केंद्र: आत्मा

मुनिराज प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. ने स्पष्ट किया कि Jain धर्म में आत्मा ही धर्म का केंद्रीय तत्व है। उन्होंने कहा कि धर्म का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ, अनुष्ठान या कर्मकांड नहीं है। असली धर्म वह है जो आत्मा की शुद्धि और कल्याण को सुनिश्चित करे। मुनिराज ने अपने प्रवचन में आत्मजागरण, आत्मनिरीक्षण और आत्मसंयम को प्रमुख बताया। उन्होंने कहा कि आत्मा की शुद्धि के बिना मनुष्य सच्चे अर्थ में मोक्ष और मुक्ति की प्राप्ति नहीं कर सकता।

धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धापूर्वक मुनिराज के विचारों को सुना और आत्मचिंतन की दिशा में प्रोत्साहित हुए। मुनिराज ने अपने उदाहरण और इतिहास के प्रसंगों से समझाया कि आत्मा के विकास के बिना किसी भी धार्मिक कर्म का मूल्य सीमित रहता है।

विहार की यात्रा और मार्ग

मुनि भगवंतों का शनिवार सायंकाल नागदा से विहार हेतु प्रस्थान हुआ। वे उमरनी ग्राम में रात्रि विश्राम करेंगे। इसके बाद रविवार प्रातः खाचरौद नगर होते हुए 23 फरवरी को संभावित रूप से भाटपचलाना में मंगलमय प्रवेश होगा।

इस विहार के दौरान मुनिभगवंत अपने अनुयायियों के साथ 10 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। यात्रा में गाजे-बाजे की ध्वनि और धार्मिक संगीत के साथ श्रद्धालुओं की उपस्थिति से आयोजन में उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बनता है।

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पुण्यसम्राट रथ और विहारधाम उद्घाटन

अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद् के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा के अनुसार, 26 फरवरी को प्रातः भाटपचलाना से सकल जैन श्रीसंघ के साथ नवीन “पुण्यसम्राट रथ” यात्रा करेगी। यह रथ यात्रा लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और श्रद्धालुओं को धार्मिक संदेश, प्रेरणा और सामूहिक आस्था का अनुभव कराएगी।

रथ यात्रा के अंतर्गत खाचरौद मार्ग स्थित भूमि दानदाता श्री पंकज जैन के नेमीनाथ वेयरहाउस परिसर की पावन भूमि पर “नेमि जयन्तराज विहारधाम” का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस समारोह में मुनि भगवंतों द्वारा निश्रा प्रदान की जाएगी। विहारधाम का संचालन श्री आदिनाथ त्रिस्तुतिक जैन श्वेताम्बर ट्रस्ट, भाटपचलाना द्वारा किया जाएगा।

विहारधाम का महत्व

विहारधाम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह Jain धर्म में आत्मा और मोक्ष की अवधारणा को भी सुदृढ़ करता है। यह स्थल श्रावकों के लिए ध्यान, साधना और आत्मचिंतन का केंद्र बनेगा। मुनिभगवंतों का यह उद्घाटन समारोह समुदाय में आध्यात्मिक चेतना और अनुशासन बढ़ाने में भी मदद करेगा।

विहारधाम में आने वाले श्रद्धालु धर्म, शिक्षा और समाज सेवा के मूल्यों को समझेंगे। यह केंद्र Jain धर्म की शिक्षाओं को सरल और व्यावहारिक रूप में लोगों तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा।

सामाजिक और धार्मिक प्रभाव

इस आयोजन से न केवल धार्मिक अनुयायियों को आध्यात्मिक अनुभव मिलेगा, बल्कि समुदाय में धार्मिक समरसता और अनुशासन को भी बल मिलेगा। मुनि भगवंतों की उपस्थिति और प्रवचन से श्रावक-श्राविकाओं में आत्मा की शुद्धि और धर्म के वास्तविक सार को अपनाने की प्रेरणा मिली।

श्रावक-श्राविकाओं ने मुनि भगवंतों के मार्गदर्शन से यह समझा कि धर्म का वास्तविक मूल्य आत्मा की उन्नति, संयम और सच्चे कर्म में है। इस प्रकार यह आयोजन धार्मिक शिक्षा का जीवंत उदाहरण बन गया।

श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

श्रद्धालु विहारधाम के उद्घाटन और रथ यात्रा से अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि मुनि भगवंतों के प्रवचन से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिला, बल्कि धार्मिक और नैतिक जीवन की दिशा स्पष्ट हुई।

स्थानीय समुदाय ने भी इस आयोजन को सामाजिक एकता और सहयोग का प्रतीक बताया। सभी ने मिलकर मुनि भगवंतों का स्वागत किया और आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।

निष्कर्ष

मुनि भगवंतों की नागदा से भाटपचलाना की यात्रा और नेमि जयन्तराज विहारधाम का उद्घाटन Jain धर्म और समुदाय के लिए ऐतिहासिक और प्रेरणादायक साबित होगा। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि धर्म का केंद्र केवल कर्म या अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और मोक्ष है।

श्रद्धालुओं और समाज के लिए यह एक अवसर है अपने जीवन में आत्मचिंतन और नैतिक मूल्यों को अपनाने का। मुनि भगवंतों के प्रवचन और रथ यात्रा के माध्यम से यह आध्यात्मिक जागरूकता और सामूहिक धार्मिक अनुशासन को बढ़ाने वाला कदम है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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