संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर, सोमवार से शुरू हो रहा है। इस सत्र में केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण बिल पेश करने की योजना में है। सत्र को सुचारू रूप से चलाने और हंगामे से बचाने के लिए सरकार सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 30 नवंबर को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। यह बैठक सुबह 11 बजे संसद भवन में होगी और इसका उद्देश्य सभी दलों के बीच शीतकालीन सत्र को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से चलाने की रणनीति तय करना है।
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पहले ही बताया था कि बैठक में विपक्षी नेताओं के साथ विधेयकों की सूची साझा की जाएगी और उनके सुझावों को ध्यान में रखते हुए सत्र की रणनीति बनाई जाएगी।

शीतकालीन सत्र की अवधि और कार्यक्रम
संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान कुल 15 बैठकें आयोजित की जाएंगी। 5 और 19 दिसंबर को निजी सदस्यों के विधेयकों पर चर्चा होगी, जबकि 12 दिसंबर को निजी सदस्यों के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा।
महत्वपूर्ण बिलों की तैयारी

इस सत्र में सरकार 10 नए विधेयक पेश करने की योजना में है। इनमें परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025, हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल, और सड़क, कंपनियों तथा बाजार से जुड़े महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक शामिल हैं। संशोधन प्रस्तावित विधेयकों में नेशनल हाईवेज (संशोधन) बिल, कॉरपोरेट लॉज (संशोधन) बिल, 2025 और सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड (SMC) बिल, 2025 शामिल हैं। इसके अलावा सरकार मध्यस्थता और सुलह अधिनियम में बदलाव लाने की भी तैयारी कर रही है।
यह शीतकालीन सत्र न केवल संसद में विधायी कार्यवाही के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच सहयोग और संवाद को भी मजबूती देगा।
